नई दिल्ली, पीटीआइ। बदलते समय के साथ महिलाएं विभिन्न क्षेत्रों में अपनी भागीदारी बढ़ा रही हैं। अब खुदरा ऋण लेने के मामले में भी महिलाओं की संख्या बढ़ रही है। रिपोर्ट के अनुसार, खुदरा ऋण लेने वालों में 28 फीसद महिलाएं हैं। यह महिलाओं के वित्तीय समावेशन का संकेत है। इंडस्ट्री के आंकड़े बताते हें कि साल 2014 से बाहरी वित्त पर महिलाओं की निर्भरता 21 फीसद की दर से बढ़ी है

क्रेडिट ब्यूरो ट्रांसयूनियन सिबिल द्वारा सोमवार को जारी रिलीज के अनुसार, इस समय खुदरा ऋण बाजार में कर्ज लेने वाली महिलाओं की संख्या 4.7 करोड़ पर पहुंच गई है। साथ ही सितंबर, 2020 तक खुदरा ऋण में महिलाओं की हिस्सेदारी बढ़कर 28 फीसद हो गई है, जो सितंबर, 2014 में 23 फीसद थी। इस तरह पिछले छह वर्षों के दौरान खुदरा ऋण लेने वाली महिलाओं की संख्या तेजी से बढ़ी है। यह बताता है कि ऋण बाजार में महिलाओं का समावेशन बढ़ रहा है।

आंकड़ों के अनुसार, खुदरा ऋम लेने वाली महिलाओं की संख्या में सालाना आधार पर 21 फीसद की बढ़ोतरी हो रही है, जबकि इस अवधि में खुदरा ऋण लेने वाले पुरुषों की संख्या सालाना आधार पर 16 फीसद बढ़ी है। मंजूर लोन राशि की बात करें, तो इस समय महिला कर्जदारों की इसमें हिस्सेदारी 15.1 लाख करोड़ रुपये पर पहुंच गई है। इस तरह पिछले छह साल के दौरान इसमें सालाना आधार पर 12 फीसद की वृद्धि हुई है।

ट्रांसयूनियन सिबिल की मुख्य परिचालन अधिकारी (COO) हर्षला चंदोरकर ने कहा, ' श्रमबल में महिलाओं की हिस्सेदारी बढ़ने के साथ-साथ सरकार की नीतियों और उपायों से महिलाओं की आर्थिक अवसरों तक पहुंच बढ़ी है। इसके परिणामस्वरूप खुदरा ऋण बाजार में महिलाओं की हिस्सेदारी बढ़ी है।'

चंदोरकर ने आगे कहा कि कुछ राज्यों द्वारा घर खरीदने वाली महिलाओं से कम स्टाम्प शुल्क लिया जा रहा है, साथ ही बैंकों द्वारा भी कर्ज लेने वाली महिलाओं के लिए बेहतर नियम और शर्तों की पेशकश की जा रही है। कई बैंकों में महिलाओं को कर्ज पर ब्याज में कुछ छूट भी दी जा रही है। इन सब वजहों से खुदरा ऋण बाजार में महिलाओं की हिस्सेदारी में बढ़ोतरी हुई है।

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