GST Council Meeting: होटल बुकिंग, रेस्टोरेंट से ट्रांसपोर्ट सर्विस तक, व्यापारियों और ई-कॉमर्स वालों के लिए क्या बदला?
GST Council Meeting 2026: जीएसटी काउंसिल की 57वीं बैठक में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने व्यापार को आसान बनाने पर ...और पढ़ें
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GST Council Meeting: होटल बुकिंग, रेस्टोरेंट से ट्रांसपोर्ट सर्विस तक, व्यापारियों और ई-कॉमर्स वालों के लिए क्या बदला?

समय कम है?
जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
बिजनेस डेस्क, नई दिल्ली| अगर आप भी अपना बिजनेस चलाते हैं या ई-कॉमर्स पर सामान बेचते हैं, तो आपके लिए बड़ी खुशखबरी है। गुरुवार को वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण की अध्यक्षता में हुई 57वीं जीएसटी काउंसिल (GST Council Meeting 2026) की बैठक में व्यापारियों को बड़ी राहत दी गई है। इस बार सरकार का पूरा फोकस 'ईज ऑफ डूइंग बिजनेस' यानी व्यापार को आसान बनाने पर रहा। बैठक में इनपुट टैक्स क्रेडिट (ITC), रास्ते में माल की चेकिंग और छोटे कारोबारियों को लेकर कई ऐतिहासिक फैसले लिए गए हैं।
1. इनपुट टैक्स क्रेडिट (ITC) में मिली बड़ी राहत
ईमानदार खरीदारों को सुरक्षा: अगर किसी खरीदार के पास सही बिल है, माल मिल गया है और उसने पूरा पेमेंट कर दिया है, तो उसे दिक्कतों से बचाने के लिए अफसरों की एक खास कमेटी बनेगी। यह कमेटी 3 महीने में अपनी रिपोर्ट सौंपेगी।
रोजमर्रा के खर्चों पर भी क्रेडिट: अब कंपनियों को अपने कर्मचारियों के हेल्थ और लाइफ इंश्योरेंस पर भी आईटीसी का फायदा मिलेगा। इसके अलावा टेलीकॉम टावर, फैक्ट्री के बाहर बिछी पाइपलाइन और एक्सपायर हो चुके फ्री सैंपल (जिन्हें नष्ट करना जरूरी है) पर भी टैक्स क्रेडिट मिलेगा।
डबल टैक्स से छुटकारा: एक ही लाइन में बार-बार खरीदी-बेची जाने वाली सर्विस पर अब दोहरी मार नहीं पड़ेगी। मसलन, एजेंट के जरिए 7,500 रुपए तक की होटल बुकिंग, रेस्टोरेंट और ट्रांसपोर्ट सर्विस पर अब डबल टैक्स नहीं लगेगा।
फंसा हुआ पैसा होगा फ्री: अब इनपुट सर्विस और प्लांट या मशीनरी पर चुकाए गए टैक्स का भी रिफंड मिलेगा। इससे फार्मा और FMCG जैसे सेक्टर्स के व्यापारियों का फंसा हुआ वर्किंग कैपिटल फ्री हो जाएगा, जिससे व्यापार में तेजी आएगी।
2. व्यापार करना हुआ और भी आसान
कारोबार बंद करने का ऑटोमैटिक प्रोसेस: छोटे टैक्सपेयर्स के लिए बिजनेस बंद करने यानी कैंसिलेशन की प्रक्रिया अब पूरी तरह ऑटोमैटिक होगी। आखिरी रिटर्न भरना भी अब इसी प्रक्रिया का ही हिस्सा होगा।
रिटर्न भरने में भारी छूट: 5 करोड़ रुपए तक के टर्नओवर वाले ऐसे व्यापारी, जो सिर्फ सीधे ग्राहकों को माल बेचते हैं, उन्हें अब साल में केवल एक बार ही रिटर्न भरना होगा। हालांकि, टैक्स उन्हें तिमाही आधार पर ही जमा करना होगा।
सड़क पर नहीं रुकेगी गाड़ी: अब सड़क पर कोई भी अफसर अपनी मर्जी से माल लदी गाड़ी नहीं रोक सकेगा। इसके लिए जॉइंट कमिश्नर रैंक के अफसर की मंजूरी और पक्की खुफिया जानकारी होना जरूरी है। माल की चेकिंग सिर्फ उसी राज्य में होगी जहां से माल चला है या जहां उसे पहुंचना है। बीच के राज्य (ट्रांजिट स्टेट) रास्ते में बेवजह गाड़ी नहीं रोक सकेंगे।
3. ई-कॉमर्स सेलर्स की बल्ले-बल्ले
अब छोटे ऑनलाइन सेलर्स को माल बेचने के लिए हर राज्य में अपना ऑफिस दिखाने की जरूरत नहीं पड़ेगी। छोटे सेलर अब किसी भी ई-कॉमर्स कंपनी (जैसे अमेजन, फ्लिपकार्ट) के दूसरे राज्य वाले गोदाम को ही अपना पता (प्रिंसिपल प्लेस ऑफ बिजनेस) दिखा सकेंगे।
इसका सीधा मतलब है कि अब आप अपने ही राज्य में बैठकर पूरे देश में आसानी से अपना माल बेच सकते हैं। इसके साथ ही, हर ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म के लिए टैक्स के नियम भी एक जैसे कर दिए गए हैं।
