नई दिल्ली, जागरण ब्यूरो। सरकार हर हालत में देश की दिग्गज कोयला कंपनी कोल इंडिया लिमिटेड (सीआइएल) से इस साल 20 हजार करोड़ रुपये चाहती है। यह राशि अगर विनिवेश से नहीं आ पाएगी तो कंपनी से विशेष लाभांश के तौर पर दस हजार करोड़ रुपये लिए जाएंगे। राजकोषीय घाटे को काबू में करने में जुटे वित्त मंत्रालय की विनिवेश सूची में कोल इंडिया पूंजीकरण के हिसाब से सबसे बड़ी कंपनी है।

कोयला मंत्री श्रीप्रकाश जायसवाल ने बताया, 'कोल इंडिया की कर्मचारी यूनियन ने सिर्फ पांच फीसद विनिवेश की इजाजत दी है, लेकिन यूनियन ने कहा है कि पांच फीसद किसी अन्य तरीके से विनिवेश किया जा सकता है।' लेकिन सूत्रों का कहना है कि वित्त मंत्रालय व कोयला मंत्रालय में पहले ही इसकी रजामंदी है कि अगर यूनियन दस फीसद हिस्सेदारी के विनिवेश के लिए तैयार नहीं होता है तो फिर कंपनी से मोटी रकम बतौर विशेष लाभांश ली जाएगी।

सीआइएल में इस समय सरकार की 90 फीसद हिस्सेदारी है, जिसका बाजार मूल्य लगभग 1.90 लाख करोड़ रुपये है। कोल इंडिया में दोबारा विनिवेश के उद्देश्य से ही सरकार ने हाल ही में कंपनी के पक्ष में कई फैसले किए हैं। इसके तहत कंपनी की कई कोयला खदानों को पर्यावरण व वन मंत्रालय की मंजूरी दिलाई गई है। 78 हजार मेगावाट क्षमता की बिजली प्लांटों को कोयला आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए एक समझौता भी किया गया है।

केंद्र ने इस साल से विनिवेश से 40 हजार करोड़ रुपये जुटाने का लक्ष्य रखा है। इसे हासिल करने के लिए जरूरी है कि सीआइएल के शेयर बेचे जाएं। कोल इंडिया के अलावा सरकारी क्षेत्र की अन्य छोटी-मोटी कंपनियों में विनिवेश कार्यक्रम भी धीरे-धीरे रफ्तार पकड़ रहा है। विनिवेश पर गठित मंत्रिसमूह (जीओएम) ने बृहस्पतिवार को तीन अन्य कंपनियों- स्टेट ट्रेडिंग कॉरपोरेशन, आइटीडीसी और नेवेली लिग्नाइट में अपनी हिस्सेदारी संस्थागत निवेशकों को बेचने का फैसला किया। ंइन तीनों के शेयर शुक्रवार को बेचे जाएंगे। सरकार को इनसे सिर्फ 360 करोड़ रुपये मिलने की उम्मीद है।

कोल इंडिया के अलावा अन्य सरकारी उपक्रमों (पीएसयू) से भी विशेष लाभांश लेने की कोशिश में वित्त मंत्रालय जुटा है। इस बारे में पीएसयू प्रमुखों के साथ वित्त मंत्री पी चिदंबरम की बैठकें भी हुई हैं। सरकारी उपक्रमों को कहा गया है कि या तो वे विस्तार पर पैसा खर्च करें या फिर सरकार को विशेष लाभांश देने के लिए तैयार रहें।