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IPO के बाद अब आएगा LIC का FPO, सरकार कर रही है तैयारी, समझें क्या है प्लान

Published: Mon, 02 Feb 2026 08:06 PM (IST)

भारत सरकार अगले वित्तीय वर्ष में एलआईसी में अपनी हिस्सेदारी और कम करने पर विचार कर रही है। वित्तीय सेवा ...और पढ़ें

सरकार एलआईसी में हिस्सेदारी कम करने पर विचार कर रही है।

सरकार एलआईसी में हिस्सेदारी कम करने पर विचार कर रही है।

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संक्षेप में पढ़ें

नई दिल्ली। भारत सरकार देश की सबसे बड़ी बीमा कंपनी LIC में हिस्सेदारी बेचने पर विचार कर रही है। वित्तीय सेवा सचिव एम नागराजू ने सोमवार को कहा कि सरकार अगले वित्तीय वर्ष में फॉलो-ऑन पब्लिक ऑफर (FPO) के माध्यम से बीमा क्षेत्र की दिग्गज कंपनी एलआईसी में अपनी हिस्सेदारी और कम करने पर सक्रिय रूप से सोच रही है।

दरअसल, वर्तमान में सरकार के पास जीवन बीमा निगम (LIC) में 96.5 प्रतिशत हिस्सेदारी है। इसने मई 2022 में प्रारंभिक सार्वजनिक पेशकश (IPO) के माध्यम से 902-949 रुपये प्रति शेयर के मूल्य पर 3.5 प्रतिशत हिस्सेदारी बेची थी। इससे सरकार को लगभग 21,000 करोड़ रुपये मिले थे।

क्या होता है FPO

फॉलो-ऑन पब्लिक ऑफर (FPO) वह प्रोसेस है जिसमें स्टॉक एक्सचेंज में लिस्टेड कोई मौजूदा कंपनी अपने मौजूदा शेयरधारकों या नए निवेशकों को शेयर जारी करती है। यह IPO से अलग होता है।

क्या है LIC का प्लान?

वित्तीय सेवा सचिव एम नागराजू ने संवाददाताओं से कहा, ‘एलआईसी के सार्वजनिक निर्गम को धीरे-धीरे लाना होगा। हमने दीपम (निवेश और लोक संपत्ति प्रबंधन विभाग) से एलआईसी में सरकार की हिस्सेदारी कम करने की संभावनाओं को देखने के लिए कहा है।’ 

उन्होंने कहा, ‘यदि सभी मंजूरियां मिल जाती हैं और बाजार की स्थिति अनुकूल रहती है, तो अगले वित्त वर्ष में एलआईसी का एफपीओ आ सकता है।’ सरकार को मई 2027 तक अनिवार्य 10 प्रतिशत सार्वजनिक शेयरधारिता की आवश्यकता को पूरा करने के लिए सार्वजनिक क्षेत्र की जीवन बीमा कंपनी में 6.5 प्रतिशत की अतिरिक्त हिस्सेदारी बेचनी होगी।

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बता दें कि देश की सबसे बड़ी बीमा कंपनी, एलआईसी का मार्केट कैप 5.08 लाख करोड़ रुपये है, और सोमवार को एलआईसी के शेयर लगभग 804 रुपये पर बंद हुए। 

वित्तीय मोर्चे पर एलआईसी ने सितंबर 2025 को समाप्त दूसरी तिमाही में शुद्ध लाभ में 32 प्रतिशत की वार्षिक बढ़ोतरी हासिल की, जो पिछले वित्त वर्ष की इसी अवधि के 7,621 करोड़ रुपये से बढ़कर 10,053 करोड़ रुपये रही।