नई दिल्ली, जागरण ब्यूरो। कोविड-19 ने जिस तरह से आर्थिक गतिविधियों को तहस-नहस किया है उसका सही सही आकलन अभी भी नहीं हो सका है। लेकिन सरकार को इस बात का अंदाजा होने लगा है कि कोविड से पहले अर्थव्यवस्था के विभिन्न आयामों को लेकर जो लक्ष्य तय किये गये थे उन्हें पूरा करने में अब काफी चुनौती है। ऐसे में आर्थिक विकास दर, राजकोषीय घाटा, महंगाई दर, राजस्व संग्रह, औद्योगिक विकास दर समेत अन्य आर्थिक मानकों को नए सिरे से तय करने की कवायद शुरु हो गई है। वित्त मंत्रालय और आरबीआइ के साथ नीति आयोग के तहत गठित विभिन्न समितियों के बीच लगातार विमर्श चल रहा है ताकि देश के विकास के नए मध्यावधि लक्ष्य तय किये जा सके।

सरकारी अधिकारी मान रहे हैं कि कोविड-19 ने जिस तरह का आर्थिक नुकसान पहुंचाया है उसे देखते हुए वर्ष 2024-25 तक 5 ट्रिलियन डॉलर की इकोनोमी बनने के लक्ष्य को पाने की सोचना बेमानी है। सरकार के मंत्री भी अब इस बारे में कोई बयान नहीं दे रहे हैं। वजह यह है कि विश्व बैंक से लेकर एसबीआइ तक की रिपोर्टों ने भारत की आर्थिक विकास दर की रफ्तार शून्य से 4-5 फीसद तक नीचे रहने का अनुमान लगाया है।

एसबीआइ समेत कुछ रिपोर्ट तो इकोनोमी में 14-22 फीसद तक गिरावट की बात कर रह हैं। ऐसे में वर्ष 2019 में जीडीपी का जो आकार 2.87 ट्रिलियन डॉलर का था वह विकास दर के नीचे आने से अब कम हो सकती है। वित्त मंत्रालय, आरबीआइ व नीति आयोग के बीच जो विमर्श चल रहा है उसका उद्देश्य अगले तीन वर्षों के भीतर आर्थिक विकास दर को फिर से 7 फीसदी की रफ्तार पर लाने का है।

आम तौर पर हर वित्त वर्ष के विकास दर का लक्ष्य सबसे पहले आम बजट में रखा जाता है और उसके बाद आरबीआइ की साल की पहली मौद्रिक नीति समीक्षा में इसके बारे में बताया जाता है। वर्ष 2020-21 के बजट में वित्त मंत्री ने 10 फीसद नोमिनल विकास दर की बात कही थी जो परंपरा से हट कर था। 27 मार्च, 2020 को आरबीआइ गवर्नर डॉ. शक्तिकांत दास ने कहा था कि मौजूदा माहौल में आर्थिक विकास व महंगाई के दर के लक्ष्य तय करने का कोई औचित्य नहीं है। 6 अगस्त, 2020 को मौद्रिक नीति समीक्षा में उन्होंने कहा कि, वर्ष 2020-21 के लिए जीडीपी ग्रोथ के निगेटिव में रहने के आसार हैं। अगर कोविड महामारी पर जल्दी काबू पा लिया जाता है तो यह हालात में सुधार भी हो सकता है लेकिन मानसून सामान्य नहीं रहा और वित्तीय बाजार की अस्थिरता जारी रही तो विकास दर की स्थिति और खराब होने का खतरा है। संभवत: पहली बार चालू वित्त वर्ष के पहले साढ़े चार महीने बीत जाने के बावजूद कोई विकास दर तय नहीं किया जा सका है।

बहरहाल, नीति आयोग के अधिकारी बताते हैं कि कुछ हफ्तों में स्थिति साफ हो जाएगी। नवंबर, 2018 में नीति आयोग ने वर्ष 2022-23 तक के लिए आर्थिक विकास के तमाम सेक्टरों के लिए अलग-अलग लक्ष्य तय किये थे। इस बारे में इंडिया एट 75 नाम से जारी किया था जिसमें वर्ष 2022 तक सालाना 9 फीसद विकास दर का लक्ष्य रखा गया था।

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