नई दिल्ली (बिजनेस डेस्क)। खस्ताहाल वित्तीय स्थिति से जूझ रहे सरकारी क्षेत्र के बैंकों को मदद देने के लिए 28,615 करोड़ रुपये के बांड्स जारी करने की सरकार की तैयारी पूरी है। इसमें से सबसे ज्यादा 10,086 करोड़ रुपये की राशि बैंक ऑफ इंडिया को जारी होगी। दूसरे स्थान पर ओरिएंटल बैंक ऑफ कॉमर्स (ओबीसी) है, जिसे 5,500 करोड़ रुपये की राशि के बांड्स जारी हो रहे हैं। इसके अलावा बैंक ऑफ महाराष्ट्र, यूको बैक और यूनाइटेड बैंक ऑफ इंडिया को भी रकम मिलने वाली है।

सरकार की आर्थिक मदद मिलने के बाद इनमें से कई बैंक आरबीआइ के प्रॉम्प्ट करेक्टिव एक्शन (पीसीए) नियम के दायरे से निकल जाएंगे। इससे आम जनता समेत छोटे व मझोले उद्योगों को ज्यादा कर्ज मिलने का रास्ता भी साफ होगा क्योंकि पीसीए की वजह से अभी 11 बैंकों की कई गतिविधियों पर पाबंदी है।

वित्त मंत्री अरुण जेटली ने हाल ही में कहा था कि सरकारी क्षेत्र के बैंकों को 41 हजार करोड़ की अतिरिक्त मदद दी जाएगी। इस मदद के लिए राशि जुटाने को सरकार ने सदन से मंजूरी भी हासिल कर ली है। इस वर्ष सरकार की तरफ से बैंकों को 65 हजार करोड़ के बांड्स जारी होने थे। 23 हजार करोड़ के बांड्स पहले जारी हो चुके हैं जबकि शेष 41 हजार करोड़ के बांड्स अब जारी करने की तैयारी है। बांड्स जारी करने की नौबत इसलिए आई है कि ये बैंक अपने आतंरिक स्नोतों से या बाजार से अपने बूते राशि जुटाने में सक्षम नहीं है।

सरकार की तरफ से यह भी संकेत दिया गया है कि इसके अतिरिक्त भी कुछ राशि अगले वर्ष मार्च तक देने की जरूरत होगी। 2018-19 में सरकारी बैंकों को जितनी आर्थिक मदद सरकारी खजाने से दी जा रही है वैसा पहले कभी नहीं की गई। वैसे पिछले एक दशक से सरकार आम बजट के माध्यम से हर वर्ष कुछ न कुछ राशि सरकारी बैंकों को दे रही है। इस वर्ष इनके एनपीए की स्थिति इतनी ज्यादा बिगड़ गई है कि इन्हें ज्यादा राशि देनी पड़ रही है। वैसे, पिछले कुछ महीनों के दौरान एनपीए में कमी आई है। इस वर्ष मार्च के आखिर में सरकारी बैंकों का कुल फंसा कर्ज (एनपीए) 9.60 लाख करोड़ का था जो सितंबर में घट कर 9.46 लाख करोड़ रह गया है। 

Posted By: Nitesh

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