नई दिल्ली (बिजनेस डेस्क)। लोकसभा चुनाव से ठीक पहले सरकार जीएसटी में पंजीकृत छोटे कारोबारियों के लिए एक बीमा योजना लाने पर विचार कर रही है। इस सेग्मेंट के कारोबारियों की स्वास्थ्य संबंधी कई चिंताओं के निवारण के लिए यह योजना ला सकती है। इसके तहत छोटे व मझोले स्तर के लाखों कारोबारियों को बेहद किफायती दर पर बीमा सुविधा मुहैया कराई जाएगी। सूत्रों का कहना है कि प्रस्तावित योजना प्रधानमंत्री सुरक्षा बीमा योजना (पीएमएसबीवाई) की तर्ज पर होगी। सूत्रों का कहना था कि उप्र में छोटे कारोबारियों के लिए दुर्घटना बीमा योजना फिलहाल चल रही है। केंद्र की नई बीमा योजना भी वैसी ही हो सकती है।

केंद्र जीएसटी में पंजीकृत छोटे कारोबारियों को उनके सालाना टर्नओवर के हिसाब से 10 लाख तक की बीमा सुरक्षा देने पर विचार कर रही है। अगर इस योजना को सरकार की मंजूरी मिल जाती है, तो संसद का बजट सत्र शुरू होने से पहले इस महीने के अंत तक इस योजना की घोषणा की जा सकती है। पीएमएसबीवाई के तहत सरकार महज 12 रुपये सालाना के प्रीमियम पर दो लाख तक की दुर्घटना बीमा सुविधा दे रही है। इसके तहत 18-70 वर्ष आयुवर्ग के व्यक्ति अपने बैंक अकाउंट में से 12 रुपये की यह रकम काट लिए जाने की इजाजत बैंक को देकर यह बीमा सुविधा ले सकते हैं।

जीएसटी चोरी रोकने के लिए सरकार देशभर में आरएफआइडी तकनीक का सहारा लेगी। इसके तहत जीएसटी में ई-वे बिल प्रणाली के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए रेडियो फ्रीक्वेंसी आइडेंटिफिकेशन डिवाइस (आरएफआइडी) के इस्तेमाल पर विचार किया जा रहा है। वर्तमान में कुछ राज्यों में ही इस तकनीक का इस्तेमाल हो रहा है।

सूत्रों ने कहा कि ई-वे बिल के तंत्र को प्रभावी बनाने में देशभर में आरएफआइडी तकनीक के इस्तेमाल का विषय हाल में हुई जीएसटी काउंसिल के एजेंडा में शामिल था। इस विषय पर डा. जॉन जोसेफ समिति की रिपोर्ट के मुख्य बिन्दु भी काउंसिल के समक्ष रखे गए और इन पर चर्चा भी हुई। फिलहाल उप्र, महाराष्ट्र और कर्नाटक जैसे राज्यों में ई-वे बिल की व्यवस्था को प्रभावी ढंग से लागू करने के लिए आएफआइडी तकनीक का सहारा लिया जा रहा है और आने वाले दिनों में इसे देश के अन्य राज्यों में भी प्रयोग में लाने का विचार है।

सूत्रों ने कहा कि फिलहाल टोल कलैक्शन के लिए फास्टैग का इस्तेमाल हो रहा है जो आरएफआइडी तकनीक पर आधारित हैं। फास्टैग सिस्टम देश के अधिकांश हाइवे टोल प्लाजा पर लग चुका है और जल्द ही राज्यों के हाइवे पर भी यह लग जाएगा। ऐसे में ई-वे बिल के तहत भी वाहनों पर नजर रखने के लिए फास्टैग प्रणाली का इस्तेमाल किया जा सकता है। 

Posted By: Nitesh

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