नई दिल्ली (हरिकिशन शर्मा)। एंजल टैक्स की मार के चलते डूबने के कगार पर पहुंचे सैकड़ों ‘स्टार्ट-अप’ को राहत देने के लिए सरकार हरकत में आ गयी है। औद्योगिक नीति एवं संवर्धन विभाग (डीआइपीपी) ने इस दिशा में कदम उठाते हुए चार फरवरी को संबंधित पक्षों की बैठक बुलाई है। इस बैठक में स्टार्ट-अप सेक्टर के प्रतिनिधियों और डीआइपीपी के शीर्ष अधिकारियों के अलावा वित्त मंत्रलय के बड़े अधिकारी भी शामिल होंगे।

सूत्रों ने कहा कि बैठक में उन नए उपायों पर चर्चा की जाएगी जिसके जरिए स्टार्ट-अप को इस टैक्स से छूट दी जा सके। बैठक में स्टार्ट-अप के साथ-साथ एंजल इन्वेस्टर्स को भी आमंत्रित किया गया है। इसमें एंजल टैक्स के मुद्दे को हल करने के लिए अब तक उठाए गए कदमों और संस्थागत तौर पर इसे हल करने के तंत्र पर भी विचार किया जाएगा।

देश में लगभग 39,000 स्टार्ट अप हैं जिसमें से 15,417 ‘स्टार्ट-अप’ डीआइपीपी से मान्यता प्राप्त हैं। चौंकाने वाली बात यह है कि तीन साल पहले स्टार्ट-अप इंडिया योजना शुरू होने के बावजूद नवंबर, 2018 तक सरकार मात्र 91 स्टार्ट-अप को ही टैक्स छूट का लाभ देने के लिए मान्यता प्रदान कर पाई है। इसका नतीजा यह हुआ है कि आयकर विभाग ने बड़ी संख्या में ‘स्टार्ट-अप’ को आयकर कानून की धारा 56(2)(सात) के तहत असेसमेंट ईयर 2015-16 और 2016-17 के लिए 30 प्रतिशत एंजल टैक्स के नोटिस थमाकर इस साल 31 मार्च तक भारी भरकम टैक्स जमा करने का आदेश दिया है। टैक्स का नोटिस पाने के बाद बड़ी संख्या में स्टार्ट-अप परेशान हैं और इनमें से कई डूबने के कगार पर हैं जिससे इनमें लगे लोगों की नौकरियां जाने का भी खतरा हो गया है।

एंजल टैक्स से परेशान स्टार्ट-अप की समस्या को उठा रहे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म लोकल सर्किल्स के चेयरमैन सचिन तापड़िया ने दैनिक जागरण से कहा कि सरकार को डीआइपीपी से मान्यता प्राप्त स्टार्ट-अप को एंजल टैक्स से पूरी तरह छूट देने के लिए ऐसा तंत्र बनाना चाहिए जिसमें स्टार्ट-अप से पांच दस्तावेज लेकर उन्हें टैक्स से छूट दे दी जाए। इसके तहत ऑडिट किया गया वित्तीय लेखा-जोखा, उनके सभी कर्मचारियों के नाम और पैन नंबर सहित मासिक वेतन ब्योरा, मासिक व्यय, सभी टीडीएस रिटर्न और अगर जीएसटी में पंजीकृत है तो जीएसटी के सभी रिटर्न जमा करने वाले स्टार्ट-अप को एंजल टैक्स से पूरी तरह छूट दे दी जाए। तापड़िया ने कहा कि सरकार को यह छूट पूर्व प्रभाव से देनी होगी ताकि पिछले वर्षो के लिए एंजल टैक्स के जो नोटिस स्टार्ट-अप को भेजे गए हैं, उनसे उन्हें राहत मिल सके। 

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