नई दिल्ली, आइएएनएस। भारतीय टेलीकॉम सेक्टर में एक बड़ा सौदा होता दिख रहा है। टेक्नोलॉजी सेक्टर की दिग्गज फर्म गूगल संकटग्रस्त टेलीकॉम कंपनी वोडाफोन आइडिया में 5 फीसद हिस्सेदारी खरीदने की तैयारी में है। इससे एक ओर जहां गूगल हाल ही में रिलायंस के जियो प्लेटफॉ‌र्म्स में हिस्सेदारी खरीदने वाली अपनी प्रतिद्वंद्वी फेसबुक को टक्कर दे सकेगी, वहीं दुनिया के सबसे तेजी से बढ़ते टेलीकॉम बाजार में संघर्ष कर रही वोडाफोन को भी फिर कदम जमाने में मदद मिलेगी। फेसबुक ने हाल ही में 43,574 करोड़ रुपये में जियो प्लेटफॉ‌र्म्स में 9.99 फीसद हिस्सेदारी खरीदने का सौदा किया है।

फाइनेंशियल टाइम्स ने रिपोर्ट दी है कि गूगल इस समय वोडाफोन के भारतीय कारोबार में निवेश की संभावनाएं तलाश रही है। वोडाफोन आइडिया ब्रिटिश टेलीकॉम कंपनी वोडाफोन और भारत के आदित्य बिड़ला ग्रुप की संयुक्त कंपनी है। यह इन दिनों गंभीर वित्तीय संकट से जूझ रही है। गूगल से सौदे की बात अभी बहुत शुरुआती स्तर पर है। रिपोर्ट का कहना है कि गूगल की मूल कंपनी अल्फाबेट ने जियो प्लेटफॉ‌र्म्स में हिस्सेदारी खरीदने का भी प्रयास किया था, लेकिन कंपनी इस मामले में फेसबुक से पिछड़ गई थी। वोडाफोन आइडिया में हिस्सेदारी से कंपनी के लिए भारत में निवेश के अन्य रास्ते भी खुलेंगे। फिलहाल गूगल या वोडाफोन आइडिया ने इस संबंध में कोई टिप्पणी नहीं की है।

सीएमआर के इंडस्ट्री इंटेलीजेंस ग्रुप के प्रमुख प्रभु राम ने कहा कि भारत तेजी से बढ़ता हुआ मोबाइल बाजार है। देश डिजिटल बदलाव के दौर से गुजर रहा है। साथ ही इस सौदे से वोडाफोन आइडिया के लिए जियो से टक्कर लेना भी संभव होगा। फिलहाल वोडाफोन आइडिया बड़े वित्तीय संकट से जूझ रही है। 

दूरसंचार विभाग के अनुसार, कंपनी पर एडजस्टेड ग्रॉस रेवेन्यू (एजीआर) के मद में 53 हजार करोड़ रुपये से ज्यादा का बकाया है। वहीं कंपनी ने अपनी गणना के हिसाब से एजीआर मद में 21,533 करोड़ रुपये बकाया होने की बात कही है। दूरसंचार विभाग के अनुसार, देश की विभिन्न टेलीकॉम कंपनियों पर एजीआर मद में कुल 1.47 लाख करोड़ रुपये का बकाया है। सुप्रीम कोर्ट ने विभाग की गणना को सही मानते हुए कंपनियों को इसी के अनुरूप बकाया चुकाने का आदेश सुनाया है। 

कंपनियों के लिए राहत की बात यही है कि दूरसंचार विभाग ने एकसाथ इतनी बड़ी देनदारी के कारण टेलीकॉम कंपनियों पर पड़ने वाले दुष्प्रभाव को ध्यान में रखते हुए सुप्रीम कोर्ट में प्रस्ताव दिया है कि बकाया चुकाने के लिए कंपनियों को 20 साल का वक्त दिया जाए। सुप्रीम कोर्ट इस प्रस्ताव पर विचार के लिए तैयार हो गया है।

Posted By: Nitesh

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