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भारत-अमेरिका टैरिफ डील में हुई देरी तो बिगड़ जाएगा खेल, एक्सपर्ट बोले- RBI को करनी पड़ेगी रेपो रेट में कटौती

Published: Sun, 25 Jan 2026 09:23 PM (IST)

गोल्डमैन सैक्स के अनुसार, भारत के आर्थिक बुनियादी कारक मजबूत वृद्धि का समर्थन करते रहेंगे। हालांकि, भारत-अमेरिका व्यापार समझौते में ...और पढ़ें

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नई दिल्ली। गोल्डमैन सैक्स ने कहा है कि भारत के आर्थिक बुनियादी कारक एक मजबूत वृद्धि का समर्थन करते रहेंगे। हालांकि, अगर भारत-अमेरिका ट्रेड डील को लेकर लंबे समय तक अनिश्चितता रहती है तो आरबीआइ को रेपो रेट को और कम करने के लिए मजबूर होना पड़ सकता है। इन्वेस्टमेंट बैंकिंग कंपनी के अनुसार, अगर व्यापार समझौते से जुड़ी मुश्किलें अगले वित्त वर्ष की पहली तिमाही के बाद भी बनी रहती हैं तो वृद्धि पर असर पड़ना शुरू हो जाएगा और ऐसे में आरबीआइ अर्थव्यवस्था का समर्थन करने के लिए रेपो रेट में कमी का कदम उठा सकता है।

गोल्डमैन सैक्स ने कहा कि ग्रामीण इलाकों और शहरों में कम आमदनी वाले परिवारों में रिकवरी अभी शुरुआती चरण में है। इस रिकवरी को अच्छे फसल उत्पादन और विभिन्न राज्यों द्वारा महिलाओं को सीधे भुगतान और जीएसटी कटौती से समर्थन मिल रहा है। उसका मानना है कि भले ही दुनियाभर में अनिश्चितता की स्थिति हो, लेकिन यह कदम मांग को धीरे-धीरे बढ़ाने में मदद कर रहे हैं।

गोल्डमैन सैक्स के मुख्य भारतीय अर्थशास्त्री शांतनु सेनगुप्ता ने उम्मीद जताई है कि अगले वित्त वर्ष की पहली तिमाही तक भारत-अमेरिका व्यापार समझौते पर मुहर लग जाएगी। हालांकि, उन्होंने चेतावनी दी है कि अगर समझौते को अगले वित्त वर्ष की दूसरी छमाही तक के लिए टाला जाता है तो वृद्धि में रुकावट आ सकती है। ऐसी स्थिति में, सरकार और आरबीआइ को अर्थव्यवस्था को समर्थन प्रदान करने के लिए कदम उठाने पड़ सकते हैं। सेनगुप्ता ने बताया कि भारत का कुल मिलाकर खपत परिदृश्य सकारात्मक बना हुआ है, लेकिन आय को लेकर तस्वीर मिली-जुली है।

एआइ के बढ़ते इस्तेमाल से मध्य आय वर्ग को हो रही दिक्कत

उन्होंने आगे कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआइ) के बढ़ते इस्तेमाल को लेकर चिंताओं के कारण मध्यम आय वर्ग को चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। नीतिगत मोर्चे पर केंद्र सरकार ने चालू वित्त वर्ष में आयकर में राहत और जीएसटी में कटौती के जरिये खपत को समर्थन करने पर फोकस किया है। भारत को कैलेंडर वर्ष 2025 में साल-दर-साल 7.6 प्रतिशत की मजबूत वास्तविक जीडीपी वृद्धि दर्ज करने में मदद मिली। हालांकि, महामारी अवधि को छोड़कर, नामिनल जीडीपी वृद्धि छह साल के निचले स्तर पर आ गई है।

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