नई दिल्ली (बिजनेस डेस्क)। जर्मनी ने ऑटोमोबाइल पार्ट्स पर कस्टम ड्यूटी बढ़ाने के भारत के फैसले पर सवाल उठाया है। जर्मनी के राजदूत ने चेतावनी दी है कि बजट प्रस्ताव भारत के लिए तब उलटा पड़ सकता है, जब यह देश आर्थिक विकास को बढ़ावा देने के लिए निर्यात पर अपनी योजना बना रहा है।

सुरक्षा कदमों को लेने के बजाय, मार्टिन नेय ने कहा, "भारत को यूरोपीय संघ के साथ एक मुफ्त व्यापार समझौते पर बातचीत करनी होगी। भारत के पास पहले से ही यूरोपीय संघ के साथ लगभग 500 करोड़ डॉलर का व्यापार अधिशेष है और नई दिल्ली ऐसा करने के लिए बहुत मजबूत स्थिति में है।"

जर्मन कंपनी ने भारत में वर्ष 2000 से अब तक 970 करोड़ डॉलर का निवेश किया है। जिसमें प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से चार लाख नौकरियां और मेक इन इंडिया को प्रोत्साहित किया है। नेय ने ऑटो-कम्पोनेंट्स प्रदर्शनी के मौके पर संवाददाता सम्मेलन में कहा, "भारत द्वारा बढ़ाई गई ऑटो कम्पोनेंट्स पर कस्टम ड्यूटी मेरी समझ से बाहर है। अगर भारत चाहता है कि उसके सकल घरेलू उत्पाद (GDP) में 8% की वृद्धि हो और निर्यात में वृद्धि करना चाहती है तो उसे भी आसान आयात की इजाजत देने की आवश्यकता है।"

जर्मनी का अधिकतम निवेश ऑटो इंडस्ट्री में है। वित्त मंत्री अरुण जेटली ने ऑटो पार्ट्स पर कस्टम ड्यूटी बढ़ाई है। इसमें इंजन, इंजन के कम्पोनेंट्स गियरबॉक्स और ट्रांसमिशन शाफ्ट्स मौजूद है, जिनका टैक्स 5-10% से बढ़ाकर 15% कर दिया गया है। इससे भारत में ही मौजूद स्थानीय मैन्युफैक्चरिंग यूनिट्स को बढ़ावा मिलेगा, लेकिन कुछ जर्मनी कंपनियों को चोट पहुंचने की उम्मीद है।

जर्मनी की तीन बड़ी लग्जरी कार निर्माता कंपनियां मर्सिडीज बेंज, ऑडी और BMW भारत में कम्पलीट्डी नॉक्ड डाउन (CKD) किट्स को इम्पोर्ट करती है और स्थानीय प्लांट में असेंबल करती है, ताकि पूरी तरह निर्मित वाहनों पर हाई इम्पोर्ट टैक्स से बचा जाए। लेकिन बजट में CKD किट्स पर इम्पोर्ट ड्यूटी 10 से 15 फीसद कर दी है।

Posted By: Surbhi Jain