नई दिल्ली (जेएनएन)। आर्थिक विकास दर के मोर्चे पर इस तिमाही में अच्छी खबर नहीं है। बुधवार को जारी हुए सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) के आंकड़ों गिरावट देखने को मिली। वित्त वर्ष 2017 के दौरान जीडीपी की विकास दर 7.1 फीसद पर रही। वहीं वित्त वर्ष की चौथी तिमाही (जनवरी से मार्च) के दौरान जीडीपी विकास दर 6.1 फीसद रही है। अर्थशास्त्री इस गिरावट की बड़ी वजह कंस्ट्रक्शन और नॉन फूड क्रेडिट सेक्टर के कमजोर प्रदर्शन को मान रहे हैं। गौरतलब कि चौथी तिमाही में कंस्ट्रक्शन सेक्टर की ग्रोथ पिछली तिमाही के 6 फीसद से घटकर -3.7 फीसद रही है। वहीं सालाना आधार पर इस सेक्टर की ग्रोथ 5 फीसद से घटकर 1.7 फीसद रह गई है।

नॉन फूड फाइनेंस सेक्टर में मंदी

बैंकों इस तिमाही में कर्ज का वितरण कम कर सके। खासतौर पर नॉन फूड फाइनेंस सेक्टर में कर्ज का वितरण धीमा रहा। तिमाही आधार पर फाइनेंनशियल, इंश्योरेंस, रियल्टी और प्रोफेशनल सर्विसेज की ग्रोथ 9 फीसद से घटकर 2.2 फीसद रह गई। वहीं सालाना आधार पर वित्त वर्ष 2017 में इस सेक्टर की ग्रोथ 10.8 फीसद से घटकर 5.7 फीसद रही।

संशोधित हुईं दरें

वित्त वर्ष 2015 की जीडीपी ग्रोथ 7.2 फीसदी से संशोधित होकर 7.5 फीसदी हो गई। वित्त वर्ष 2014 की जीडीपी ग्रोथ 6.5 फीसदी से संशोधित होकर 6.4 फीसदी हो गई। वित्त वर्ष 2013 की जीडीपी ग्रोथ बिना बदलाव के 5.5 फीसदी पर बरकरार रही।

विशेषज्ञ का नजरिया

अर्थशास्त्री और नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ पब्लिक फाइनेंस एंड पॉलिसी की सलाहकार राधिका पांडे के मुताबिक जीडीपी ग्रोथ में गिरावट की बड़ी वजह फाइनेंनशियल और कंस्ट्रक्शन सेक्टर का खराब प्रदर्शन रहा है। राधिका के मुताबिक नॉन फूड क्रेडिट की सुस्त पड़ी मांग और बैंकों में डूबे हुए कर्जों की हालत सेक्टर के लिए चिंताजनक है। साथ ही जीडीपी में घटता निवेश भी अर्थव्यवस्था के लिए नकारात्मक है।


 

Posted By: Praveen Dwivedi