जागरण ब्यूरो, नई दिल्ली। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में नई वृद्धि ने सरकार की चिंताओं को बढ़ा दिया है। सरकार को अभी महंगाई की दर और ऊर्जा सुरक्षा के बीच में संतुलन बिठाने के लिए जद्दोजहद करनी पड़ रही है। सरकार के भीतर यह भी माना जा रहा है कि अभी तेल कंपनियों को पेट्रोल और डीजल कीमत को लेकर जो हानि उठानी पड़ रही है वह ज्यादा दिनों तक बना कर नहीं रखी जा सकती।

ऊर्जा सुरक्षा पर फोकस

ऐसे में बहुत संभव है कि आने वाले दिनों में तेल कंपनियां एक बार फिर देश में पेट्रोल व डीजल की खुदरा कीमतों में इजाफा करें। यह वृद्धि कब होगी, यह फैसला कंपनियां उच्च स्तर पर विमर्श के बाद ही करेंगी। सूत्रों की मानें तो सभी विकल्पों पर विचार किया जा रहा है लेकिन ऊर्जा सुरक्षा को सबसे ज्यादा प्राथमिकता दी जाएगी।

पेट्रोल और डीजल की पर्याप्त आपूर्ति

सूत्रों का कहना है कि मार्च-अप्रैल के दौरान पेट्रोलियम उत्पादों की कीमतों मे जो वृद्धि की गई थी उसका मांग पर कोई असर नहीं हुआ है। उक्त वृद्धि के बाद देश में पेट्रोल की मांग में 14 फीसद और डीजल की मांग में दो फीसद की वृद्धि हुई है। सरकार की प्राथमिकता है कि पूर देश में जरूरत के हिसाब से पेट्रोल व डीजल की पर्याप्त आपूर्ति हो।

पेट्रोलियम उत्पादों की बिक्री से मुनाफा

हमारे पास पर्याप्त ऊर्जा भंडार रहे इसके लिए जरूरी है कि तेल कंपनियों को भी पेट्रोलियम उत्पादों की बिक्री से मुनाफा हो तभी वो आगे के लिए खर्च कर सकेंगी। आज की तारीख में दुनिया के कई विकसित देशों में में पेट्रोलियम उत्पादों का संकट दस्तक दे रहा है। भारत में यह स्थिति नहीं आनी चाहिए।

क्रूड आयल हुआ महंगा

तेल कंपनियों ने 06 अप्रैल, 2022 के बाद से खुदरा कीमतें नहीं बढाई हैं लेकिन उसके बाद क्रूड महंगा हो कर 112 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गया है। क्रूड के महंगा होने से पेट्रोलियम कंपनियों का कहना है कि उन्हें पेट्रोल पर 9-10 रुपये प्रति लीटर और डीजल पर 25 रुपये प्रति लीटर की हानि हो रही है। जबकि 22 मार्च से 6 अप्रैल, 2022 के दौरान तेल कंपनियों ने पेट्रोल और डीजल पर 10 रुपये प्रति लीटर की वृद्धि की थी।

दिखेगा गिरावट का रुख

माना जा रहा है कि इस बार कंपनियां इतनी ज्यादा वृद्धि नहीं करेंगी क्योंकि इसका असर सीधे तौर पर महंगाई दर पर होगा। सरकार का अपना आकलन है कि जल्द ही कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट का रुख दिखेगा। ऐसे में तेल कंपनियां अभी जो घाटा उठा रही हैं उसकी भरपाई बाद में वो कर सकती हैं।

उर्वरक सब्सिडी में भारी इजाफा

सरकार के पास पेट्रो उत्पादों पर शुल्क घटाने का विकल्प है लेकिन उसे अभी आजमाने को लेकर कोई चर्चा नहीं हुई है। विनिवेश लक्ष्य पूरा नहीं होने, उर्वरक सब्सिडी में भारी इजाफा होने की स्थिति में सरकार इस विकल्प पर सबसे अंत समय में विचार करने के पक्ष में है।

Edited By: Krishna Bihari Singh