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स्वतंत्र फोरेंसिक ऑडिट से साबित होगा, शेयर ट्रांसफर में फोर्टिस की भूमिका नहीं; मामले पर किसने क्या कहा?

By Jagran BusinessEdited By: Ankit Kumar Katiyar
Published: Sun, 27 Sep 2026 05:46 PM (IST)

फोर्टिस हेल्थकेयर को भरोसा है कि स्वतंत्र फोरेंसिक ऑडिट से यह साबित होगा कि पूर्व प्रमोटरों के शेयर ट्रांसफर में ...और पढ़ें

फोर्टिस हेल्थकेयर को फोरेंसिक ऑडिट से शेयर ट्रांसफर मामले में क्लीन चिट मिलने का भरोसा

फोर्टिस हेल्थकेयर को फोरेंसिक ऑडिट से शेयर ट्रांसफर मामले में क्लीन चिट मिलने का भरोसा

HighLights

  1. फोर्टिस को पूर्व प्रमोटरों के शेयर ट्रांसफर में भूमिका न होने का भरोसा।

  2. सुप्रीम कोर्ट ने फोरेंसिक ऑडिट को आगे बढ़ने की दी मंजूरी।

  3. हाईकोर्ट की टिप्पणियां अस्थायी, ऑडिट को नहीं करेंगी प्रभावित।

बिजनेस डेस्क, नई दिल्ली| फोर्टिस हेल्थकेयर ने कहा है कि उसे भरोसा है कि स्वतंत्र फोरेंसिक ऑडिट से यह साफ हो जाएगा कि कंपनी की ओर से उसके पूर्व प्रमोटरों मलविंदर सिंह और शिविंदर सिंह के शेयर ट्रांसफर में कोई भूमिका नहीं थी। कंपनी ने यह बात एक्सचेंज फाइलिंग में कही है।

सुप्रीम कोर्ट ने फोरेंसिक ऑडिट को आगे बढ़ने की मंजूरी दी है। साथ ही कोर्ट ने साफ किया है कि दिल्ली हाईकोर्ट के 31 अगस्त के फैसले में फोर्टिस को लेकर की गई कुछ टिप्पणियां अंतिम नहीं, बल्कि अस्थायी हैं। इन टिप्पणियों का इस्तेमाल सिर्फ फोरेंसिक ऑडिट का आधार बनाने के लिए किया गया था।

हाई कोर्ट में दाखिल की थी स्पेशल लीव पिटीशन

फोर्टिस ने हाईकोर्ट के आदेश के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में स्पेशल लीव पिटीशन (SLP) दाखिल की थी। कंपनी ने ऑडिट के निर्देश और अपने बारे में की गई कुछ टिप्पणियों को चुनौती दी थी। सुप्रीम कोर्ट ने 25 सितंबर के आदेश में इस SLP का निपटारा कर दिया।

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि,

हाईकोर्ट के फैसले के जिन हिस्सों में फोर्टिस को लेकर टिप्पणियां की गई हैं, वे फोरेंसिक ऑडिट या उसके नतीजे को प्रभावित नहीं करेंगी। ऑडिट इन टिप्पणियों से स्वतंत्र होकर किया जाना है।"

फोर्टिस ने यह भी कहा कि दाइची सैंक्यो और सिंह ब्रदर्स के बीच हुए विवाद से उसका कोई संबंध नहीं है। कंपनी के मुताबिक, वह दोनों पक्षों के बीच हुई आर्बिट्रेशन में कभी पक्षकार नहीं रही। दाइची सैंक्यो की डिक्री के मामले में भी फोर्टिस न तो जजमेंट डेटर है और न ही गार्निशी।

फोर्टिस को नहीं मिली कोई रकम

कंपनी ने कहा कि पब्लिक लिस्टेड कंपनी होने के नाते उसके पास अपने पूर्व प्रमोटरों के शेयर ट्रांसफर को नियंत्रित करने का कोई अधिकार या क्षमता नहीं थी। सिंह ब्रदर्स की शेयरहोल्डिंग खत्म होने से फोर्टिस को कोई रकम या आय भी नहीं मिली।

फाइलिंग में फोर्टिस ने यह भी बताया कि,

सिंह ब्रदर्स के कंपनी से बाहर होने के बाद स्वामित्व कैसे बदला। मार्च 2018 तक दोनों की हिस्सेदारी घटकर 1% से भी कम रह गई थी और उन्होंने बोर्ड से इस्तीफा दे दिया था। इसके बाद संस्थागत शेयरधारकों ने स्वतंत्र निदेशकों की नियुक्ति की।"

जून 2018 में नए बोर्ड ने निवेश बैंकर्स और कानूनी सलाहकारों की मदद से नए निवेशक के लिए प्रतिस्पर्धी बोली प्रक्रिया शुरू की। इसके बाद मलेशिया के IHH Healthcare Berhad समूह की कंपनी Northern TK Venture Pte Ltd फोर्टिस की प्रमोटर शेयरधारक बनी।

नवंबर 2018 में सभी जरूरी नियामकीय और वैधानिक मंजूरियां मिलने के बाद कंपनी में फ्रेश इक्विटी शेयर जारी किए गए। फोर्टिस के मुताबिक, यह निवेश सिंह ब्रदर्स का कंपनी से संबंध खत्म होने के कई महीने बाद हुआ और इसमें उनके शेयरों का कोई ट्रांसफर शामिल नहीं था।