जागरण ब्यूरो, नई दिल्ली। टूथपेस्ट, साबुन, तेल, घी जैसे उत्पाद बनाने वाले एफएमसीजी क्षेत्र की स्थिति में इस साल भी कोई खास बदलाव की उम्मीद नहीं है। अनुमान लगाया जा रहा है कि साल 2020 में इस क्षेत्र की वृद्धि दर 9 से 10 फीसद तक रहेगी। नीलसन के मुताबिक साल 2019 में भी इस क्षेत्र की वृद्धि दर 9.7 फीसद रही है। जबकि क्रिसिल का मानना है कि वित्त वर्ष 2020-21 में इस क्षेत्र की वृद्धि दर 11 फीसद हो सकती है। एफएमसीजी क्षेत्र पर कुछ एजेंसियों की तरफ से कराये गए सर्वे में यह बात उभर कर आई है कि देश में इन उत्पादों की मांग में पिछले साल के मुकाबले बहुत ज्यादा परिवर्तन नहीं आया है।

नीलसन की ताजा रिपोर्ट के मुताबिक साल 2019 में एफएमसीजी की ग्रोथ में ई-कामर्स प्लेटफार्म पर हुई बिक्री भी शामिल है। नीलसन ग्लोबल कनेक्ट साउथ एशिया जोन के प्रेसिडेंट प्रसून बसु ने कहा, 'साल 2019 एफएमसीजी इंडस्ट्री के लिए मुश्किल भरा वर्ष रहा। साल 2018 में इसमें 13.5 फीसद की ग्रोथ हुई थी। लेकिन अब इसमें स्थिरता दिख रही है। इसलिए बीते वर्ष की वृद्धि दर इस साल भी बने रहने के आसार हैं।'साल 2019 की चौथी तिमाही में एफएमसीजी इंडस्ट्री की ग्रोथ 6.6 फीसद पर ही रुक गई। यदि इसमें ई-कामर्स में हुई बिक्री को शामिल कर लिया जाए तो वृद्धि की दर 7.3 फीसद हो जाती है। पिछली तिमाहियों में आयी तेज गिरावट के मुकाबले इसमें चौथी तिमाही में गिरावट की रफ्तार थमती दिखी है।

रेटिंग एजेंसी क्रिसिल ने चार लाख करोड़ रुपये के आकार वाले एफएमसीजी सेक्टर की ग्रोथ का अनुमान वित्त वर्ष के आधार पर लगाया है। एजेंसी का मानना है कि वित्त वर्ष 2019-20 में इस क्षेत्र की ग्रोथ रेट 9 फीसद रहेगी। लेकिन ग्रामीण क्षेत्र से मांग आने पर वित्त वर्ष 2020-21 में एफएमसीजी की वृद्धि दर 11 फीसद तक पहुंच सकती है। क्रिसिल के मुताबिक एफएमसीजी सेक्टर की मांग में बढ़त मार्च-अप्रैल 2020 के बाद दिखना शुरू होगी जब खेती से होने वाली आमदनी में वृद्धि होगी। क्रिसिल के सीनियर डायरेक्टर अनुज सेठी का मानना है, 'सरकार की तरफ से ग्रामीण इन्फ्रास्ट्रक्चर पर अधिक खर्च ग्रामीण क्षेत्र में आमदनी बढ़ाने में मदद करेगा। इसके चलते एफएमसीजी उत्पादों की मांग में वृद्धि होगी।' एजेंसी का मानना है कि शहरी क्षेत्र में परंपरागत बाजार में एफएमसीजी उत्पादों की मांग 8 फीसद से अधिक होने की उम्मीद नहीं है। इस बाजार में मॉडर्न रिटेल यानी ई-कामर्स का हिस्सा भी बढ़ रहा है। साथ ही सभी कंपनियों की वृद्धि दर एक समान रहने की उम्मीद भी नहीं है। एजेंसी के विश्लेषण के मुताबिक करीब 57 कंपनियां पूरे क्षेत्र के रेवेन्यू के आधे पर काबिज हैं। 

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