नई दिल्ली। टाटा ग्रुप के 149 सालों के इतिहास में यह पहला मौका है जब किसी गैर पारसी व्यक्ति को टाटा संस की कमान सौंपी गई है। टाटा संस के नए चेयरमैन पद के लिए जहां इंदिरा नूयी, अरुण सरीन और नोएल टाटा जैसे दिग्गज होड़ में थे ऐसे में एन चंद्रशेखर क्यों इन सब पर भारी पड़े यह निश्चित तौर पर सभी के मन में आने वाला एक सवाल है। एन चद्रशेखरन क्यों टाटा संस के प्रमुख पद के लिए पहली पसंद बनेे इसके पांच संभावित कारण इस प्रकार हैं। जानिए चंद्रशेखरन को टाटा संस के चेयरमैन पद के लिए आखिर क्यों चुना गया....

1. मजबूत दावेदार:
अन्य उम्मीदवारों की तुलना में चंद्रशेखरन का प्रोफाइल काफी मजबूत और उपलब्धियों से भरा था। उनके नेतृत्व में साल 2010 के दौरान टीसीएस में तीन गुना उछाल देखने को मिला। वित्त वर्ष 2016 में आया यह उछाल 30,000 करोड़ (6.34 बिलियन डॉलर) से 1.09 लाख करोड़ (16.5 बिलियन डॉलर) तक का रहा। उनके कार्यकाल में ही कंपनी का प्रॉफिट तीन गुना बढ़कर 7,093 करोड़ से 24,375 करोड़ रुपए का हो गया। देश की सबसे बड़ी सॉफ्टवेयर निर्माता कंपनी 350,000 लोगों को रोजगार दे रही है।

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2. सक्षम नेता और ऊर्जावान व्यक्तित्व:
चंद्राशेखरन ने खुद को सक्षम नेता के तौर पर साबित किया है। उन्होंने अक्सर प्रस्थापित मानदंडों को बदला। जैसा कि कंपनी की 23 बिजनेस इकाइयों में माना जाता था। वो जिस भी बिजनेस से जुड़े उन्होंने वहां बेहतर काम करके दिखाया। इसके बाद उन्होंने आठ अलग-अलग ग्रुप की उन कंपनियों को इकट्ठा किया जिसके हैड उन्हें रिपोर्ट करते थे। छोटे और फोकस्ड बिजनेस यूनिट की उनकी रणनीति को उनकी प्रतिद्वंदी इन्फोसिस ने भी दोहराया था।

3. अंतरराष्ट्रीय स्तर पर जाना माना नाम:
इतना ही नहीं चंद्रा अंतरराष्ट्रीय स्तर पर एक जाना माना नाम है। टाटा के अंदरूनी सूत्रों के मुताबिक चंद्रा वो शख्सियत हैं जो वैश्विक आर्थिक हालातों से अच्छी तरह परिचित भी हैं। टाटा उन वैश्विक कंपनियों में शुमार है जिसके पास जीई, जेपी मोर्गन, वॉल मार्ट, होम डिपोट, कंतास, इलेक्ट्रॉनिक आर्ट्स, एबीबी, सिस्को और वोडाफोन जैसे बड़े क्लाइंट हैं।

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4. इंडस्ट्री के चहेते:
एन चंद्रशेखरन की मौजूदगी तमाम अंतरराष्ट्रीय मंचों पर समय समय पर दर्ज होती रही है। चंद्रशेखरन को इंडस्ट्री का जाना-माना चेहरा माना जाता है। उन्होंने 1987 में सॉफ्टवेयर प्रोग्रामर के तौर पर अपनी पारी शुरू करने के बाद उनका कद कंपनी में काफी तेजी से बढ़ा। कंपनी में उनका कद इतनी तेजी से बढ़ा कि साल 2007 आते आते वो कंपनी के सीओओ बन गए। सितंबर 2014 में चंद्रा को टीसीएस के बॉस के तौर पर पांच साल का सेवा विस्तार दिया गया।

5. बड़ा विजन रखने वाले:
टीसीएस में व्यस्ततम शेड्यूल के बावजूद नटराजन चंद्रशेखरन देश की आईटी इंडस्ट्री में अपनी छवि एक स्टेट्समैन के तौर पर बनाई। साल 2012 में इंडस्ट्री बॉडी नैस्कॉम के चैयरमैन पद पर रहते हुए उन्होंने इंडस्ट्री के 2020 विजन का खाका तैयार कर दिया था। नैस्कॉम की सीनियर वीपी संगीता गुप्ता ने बताया था कि चंद्रा ऑपरेशन और विजन इन दोनों के मामले में निपुण व्यक्ति हैं।

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