नई दिल्ली: बैंकों में बढ़ते एनपीए (नॉन परफॉर्मिंग एसेट) के कारण से अगले वर्ष चीन और भारत के बैंकों पर भारी दबाव बना रहेगा, हालांकि किसी भी गंभीर जोखिम से निपटने के लिए इनके पास पर्याप्त पूंजी और आय मौजूद है। ऐसा गुरुवार को वैश्विक रेटिंग एजेंसी फिच ने चेतावनी देते हुए कहा है।

फिच ने अपनी एक रिपोर्ट में कहा है कि क्षेत्र के तीन चौथाई बैंकों के लिए हमारा 2017 का परिदृश्य नकारात्मक है। लेकिन किसी भी गंभीर चुनौती से निपटने के लिए आय और पूंजी पर्याप्त है। हमारा मानना है कि चीन और भारत में रेटिंग पर दबाव बना रहेगा।

फिच ने यह भी कहा है कि एशिया प्रशांत क्षेत्र के अधिकांश बैंकों के सामने वर्ष 2017 में एसेट्स में गिरावट का खतरा है क्योंकि चुनौतीपूर्ण आर्थिक माहौल से कर्ज लेने वालों पर दबाव रहेगा। इसके अनुसार हमारा मानना है कि इमर्जिंग मार्केट में आर्थिक वृद्धि दर 2017 में और नरम होकर 6.4 फीसदी रहेगी।

वहीं, दूसरी ओर कमोडिटी क्षेत्र में गिरती कीमतों के कारण रिर्सोसेज सेक्टर के लिए वित्तींय समस्याम बनी रहेगी, जो कि बैंकों के लिए गंभीर हो सकती है।

वैश्विक रेटिंग एजेंसी का यह भी कहना है कि डोनाल्ड ट्रंप का अमेरिका राष्ट्रपति चुनाव जीतना भी एक समस्या की बात है। ऐसा इसलिए क्योंकि वह पहले ही ब्याज दरों में बढ़ोतरी और डॉलर को मजबूत बनाने की बात कह चुके हैं। डॉलर में मजबूती की वजह से एपीएसी एक्सपोर्टर्स को नुकसान होगा और इससे डॉलर में कर्ज लेने वालों के लिए समस्या बढ़ेगी।

Posted By: Surbhi Jain

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