नई दिल्ली। अर्थव्यवस्था की घटी रफ्तार, खस्ताहाल खजाने और संप्रग सरकार के आगे खड़ी सियासी मुश्किलों के बीच आम बजट बना रहे वित्त मंत्री ने इसके सियासी प्रबंधन की शुरुआत अपने घर से की। बजट पर रायशुमारी के लिए गुरुवार को कांग्रेस पार्टी के नेताओं के साथ हुई वित्त मंत्री की बैठक अर्थव्यवस्था की मजबूरियों और राजनीतिक परेशानियों के बीच उलझी रही। सारा जोर इस बात पर था कि सख्त फैसले अर्थव्यवस्था की जरूरत हैं। और उनका सियासी बचाव पार्टी के आगे एकमात्र विकल्प।

उहापोह में फंसी पार्टी ने वित्त मंत्री के आवास पर करीब दो घंटे चले विमर्श के बाद केवल इतना ही कहा कि आम आदमी के हितों का ध्यान रखते हुए बजट बनाया जाए। हालांकि, नौ फीसद की अपेक्षा सात फीसद से कम की आर्थिक रफ्तार का हवाला देते हुए वित्त मंत्री ने स्पष्ट कर दिया कि खजाने की सेहत बहुत लोकप्रिय बजट पेश करने की इजाजत नहीं देती। वैसे भी उत्तर प्रदेश समेत पांच राज्यों के चुनाव के बाद 2014 में लोकसभा चुनाव के बीच यही एक बजट है, जिसमें कुछ कड़े फैसले किए जा सकते हैं।

इस बारे में प्रणब मुखर्जी ने विस्तार से एक प्रस्तुतीकरण दिया। इसके बाद कांग्रेस नेताओं के पास बहुत कुछ बोलने को नहीं था। यही कारण था कि जितने भी नेता निकले, सबने अपने मुंह सी लिए थे। 16 मार्च को पेश होने वाले आम बजट की तैयारियों पर वित्त मंत्री की यह पहली राजनीतिक बैठक थी। प्रणब की क्लास में वैसे भी बहुत ज्यादा कांग्रेस नेताओं के पास बोलने को नहीं था, लेकिन इक्का-दुक्का लोगों ने आम आदमी का ध्यान रखने की बात कही। इस पर वित्त मंत्री ने तुरंत कहा कि यह बजट ही आम है।

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