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वाशिंगटन। भारतीय मसालों और अन्य खाद्य उत्पादों में बैक्टीरिया संक्रमण की जांच के बाद अब अमेरिकी खाद्य नियामक एफडीए ने भारतीय बासमती चावल में आर्सेनिक की जांच तेज कर दी है। खाद्य एवं दवा प्रशासन (एफडीए) विभिन्न देशों से आयात होने वाले चावल में इस रसायन की मौजूदगी के स्तर की जांच कर रहा है।

नियामक ने आयात किए जाने वाले अलग-अलग किस्मों के चावल के 1,300 नमूनों का परीक्षण किया है। हालांकि इनमें आर्सेनिक की मात्रा खतरनाक स्तर पर नहीं पाई गई है लेकिन जितनी मात्रा पाई गई है, लंबी अवधि में उसके जोखिम का आकलन एफडीए ने शुरू किया है। आर्सेनिक वातावरण में मौजूद रहने वाला एक रसायन है। यह प्रकृति और मानव शरीर में भी पाया जाता है। लेकिन इसकी ज्यादा मात्रा लंबी अवधि में नुकसानदेह होती है। इससे त्वचा, ब्लाडर और फेफड़ों के कैंसर का खतरा होता है। विभिन्न फसलों के पौधे जमीन से ज्यादा मात्रा में आर्सेनिक ग्रहण नहीं करते। मगर धान की फसल जमीन और पानी से ज्यादा मात्रा में आर्सेनिक ग्रहण करती है।

एफडीए ने अपनी नई रिपोर्ट में कहा है कि उसने चावल और चावल उत्पादों में आर्सेनिक के स्तर की जांच रफ्तार बढ़ा दी है। नियामक का अगला कदम जोखिम का आकलन करने का है ताकि चावल और चावल उत्पादों को खाने से स्वास्थ्य संबंधी खतरों का पता लगाया जा सके। इसके अलावा एफडीए उपभोक्ताओं को इन खतरों से बचाने के लिए जरूरी कदम उठाएगा। पिछले 25 साल में अमेरिका में चावल के आयात में खासी बढ़ोतरी हुई है। आयात में ज्यादातर हिस्सेदारी थाईलैंड के एशिया-जैस्मिन और भारत के बासमती चावल की है। वर्ष 2012-13 में अमेरिका में 1.95 करोड़ टन चावल का आयात होने का अनुमान है।

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