सुरेंद्र प्रसाद सिंह, नई दिल्ली। कोरोना लाकडाउन से पैदा हुए संकट में उपभोक्ताओं को खाद्यान्न बांटने के लिए किसानों की कमाई ही काम आयी है। सरकारी स्टॉक में अनाज का इतना अधिक भंडार है कि सरकार तीन महीने तक निर्धारित मात्रा का दोगुना अन्न बांटे तो भी यह कम नहीं पड़ेगा। सरकार ने बृहस्पतिवार को गरीबों के के लिए प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना का राहत पैकेज घोषित किया है। इसके तहत उपभोक्ताओं को राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम के तहत अनाज की जितनी मात्रा दी जाती थी, अब उसकी दोगुनी मात्रा में अनाज दिया जाएगा। अतिरिक्त मात्रा वाला अनाज बिल्कुल मुफ्त होगा। यह प्रावधान पूरे तीन महीने तक के लिए किया गया है।

सरकारी गोदामों में फिलहाल 5.34 करोड़ टन अनाज का स्टॉक है, जो लगभग सालभर की जरूरतों को पूरा कर सकता है। दरअसल, राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम को लागू करने में सालाना 6.1 करोड़ टन अनाज की जरूरत होती है। इसके मुकाबले राज्यों का उठाव (आफटेक) 15 से 20 फीसद कम होता है। भारतीय खाद्य निगम के आंकड़ों के मुताबिक एक अप्रैल को बफर स्टॉक में मानक हिसाब से कुल 2.10 करोड़ टन अनाज होना चाहिए, जिसमें 1.35 करोड़ टन चावल और 75 लाख टन गेहूं होना चाहिए। इसके मुकाबले बफर स्टॉक ओवर लोडेड है। इस समय स्टॉक में कुल 5.34 करोड़ टन अनाज है।

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण के राहत पैकेज के हिसाब से अगर सार्वजनिक वितरण प्रणाली (पीडीएस) के तहत राशन दुकानों से हर महीने उपभोक्ताओं को अनाज की मौजूदा मात्रा दोगुनी कर दी जाएगी। इसका मतलब प्रति व्यक्ति पांच किलो और बीपीएल श्रेणी के उपभोक्ताओं को सात किलो की जगह उनकी मात्रा दोगुनी कर 10 किलो और 14 किलो कर दी जाएगी। फिलहाल हर महीने पीडीएस में जहां 40 से 50 लाख टन अनाज की जरूरत पड़ती है, वह बढ़कर हर महीने अधिकतम लगभग एक करोड़ टन हो जाएगी। लिहाजा इतना अऩाज तीन महीने तक बांटने के लिए कुल (300 लाख टन) तीन करोड़ टन अनाज की जरूरत होगी। सरकारी गोदामों में इस हिसाब से पर्याप्त अनाज है। गरीबों के अन्न राहत पैकेज से सरकारी खरीद एजेंसियों को भी बड़ी राहत मिलने की संभावना है। गोदामों में गेहूं व चावल का पुराना स्टॉक भरा हुआ है, जिससे नये सीजन में गेहूं की होने वाली खरीद का स्टॉक रखने की जगह नहीं है।

सरकार की इस पीडीएस के राहत पैकेज से गोदामों से गेहूं व चावल का पुराना स्टॉक खाली हो जाएगा। इससे अनाज को बाहर रखने की मजबूरी से मुक्ति मिल जाएगी। खाद्य मंत्रालय की लाख कोशिशों के बावजूद गोदामों में पड़े पिछले साल के गेहूं का कोई लेनदार नहीं था। निर्यात बाजार तो दूर घरेलू खुले बाजार में भी कोई उठाने को तैयार नहीं था। पिछले दिनों मंत्रालय ने सभी राज्यों को तीन महीने से छह महीने तक का एडवांस अऩाज उठाने का आफर दिया था, लेकिन बहुत सफलता नहीं मिल पा रही थी। इसी तरह नैफेड के गोदामों में तीस लाख टन दालें पड़ी हुई है, जिसे बृहस्पतिवार को घोषित राहत पैकेज में गरीबों को बांटने का ऐलान किया गया है। इससे यहां के गोदाम भी खाली हो जाएंगी, जिसके निपटान को लेकर नैफेड बुरी तरह परेशान था। कोरोना संकट के दौरान बचा हुआ खाद्यान्न काम आ गया। 

Posted By: Nitesh

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