नई दिल्ली, राजीव कुमार। चालू वित्त वर्ष (2021-22) में भारत निर्यात में नया रिकार्ड बनाने की ओर है। निर्यात सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) का ग्रोथ इंजन बनने के लिए भी तैयार है। चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही (अप्रैल-जून, 2021) के जीडीपी विकास में निर्यात का योगदान 40 फीसद रहा। वित्त वर्ष 2019-20 की पहली तिमाही में निजी खपत के मद में 20,24,421 करोड़ रुपये खर्च किए गए जबकि इस वर्ष अप्रैल-जून में यह खर्च 17,83,611 करोड़ रुपये का रहा। वहीं, इस साल अप्रैल-जून में निर्यात 7,68,589 करोड़ रुपये का रहा जबकि वित्त वर्ष 2019-20 की समान अवधि में 7,06,991 करोड़ रुपये का निर्यात किया गया।

विशेषज्ञों के मुताबिक जिस तरीके से वैश्विक माहौल बन रहा है और सरकार की तरफ से निर्यात बढ़ोतरी के लिए प्रयास किए जा रहे हैं, उस देखते हुए निश्चित रूप से निर्यात को जीडीपी के ग्रोथ इंजन के रूप में देखा जा सकता है। चालू वित्त वर्ष के लिए सिर्फ वस्तु निर्यात के लिए 400 अरब डालर का लक्ष्य रखा गया है और अप्रैल-अगस्त में लक्ष्य का 41 फीसद हासिल किया जा चुका है।

एचडीएफसी बैंक की वरिष्ठ अर्थशास्त्री साक्षी गुप्ता के मुताबिक फिलहाल वैश्विक बाजार में भारत के लिए अपनी हिस्सेदारी बढ़ाने का अच्छा मौका है। अगस्त में कोरोना के नए वरिएंट की वजह से एशिया के अन्य देशों का निर्यात खासा प्रभावित रहा, लेकिन भारत के निर्यात में बढ़ोतरी दिखी। भारत अभी सप्लाई चेन, लाजिस्टिक्स समस्या और फ्रेट शुल्क जैसी समस्याओं का समाधान करके अन्य देशों को निर्यात बाजार में पीछे छोड़ सकता है। वैश्विक निर्यात में भारत की हिस्सेदारी दो फीसद से भी कम है। गुप्ता का मानना है कि भारतीय निर्यात की विकास इस रफ्तार से जारी रह सकती है क्योंकि अमेरिका और यूरोप रिकवर कर रहे हैं और वहां से अच्छी मांग निकल रही है।

विशेषज्ञों के मुताबिक प्रोडक्शन लिंक्ड इंसेंटिव (पीएलआइ) स्कीम एवं अन्य प्रोत्साहन पैकेज की वजह से भारत कई हाई वैल्यू वाले उत्पादों के निर्यात में तेजी से आगे बढ़ सकता है। हाई एंड वैल्यू वाले इलेक्ट्रॉनिक्स उत्पाद के निर्यात में चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही में पिछले वर्ष समान अवधि के मुकाबले 15 फीसद का इजाफा रहा। इसके अलावा मोबाइल फोन, फार्मा, मशीनरी जैसे हाई वैल्यू उत्पाद के निर्यात में भी बढ़ोतरी हो रही है।

विशेषज्ञों का कहना है कि अमूमन ऐसा देखा जाता है कि निर्यात की बढ़ोतरी कम रहने पर जीडीपी की विकास दर भी कम रहती है। हालांकि कुछ विशेषज्ञ अब भी घरेलू खपत को ही विकास के प्रमुख माध्यम के रूप में देख रहे हैं। एसबीआइ के समूह मुख्य आर्थिक सलाहकार एसके घोष के मुताबिक हमें मान लेना होगा कि घरेलू खपत ही विकास के प्राथमिक इंजन के रूप में रहेगी और इसमें बढ़ोतरी के बगैर उच्च और टिकाऊ विकास दर को हासिल करना कठिन है। विशेषज्ञ यह भी कह रहे है कि निर्यात में इतनी अधिक बढ़ोतरी के पीछे वस्तुओं की कीमतों होने वाली तेजी का भी हाथ है।

Edited By: Ankit Kumar