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Explainer: टाटा ट्रस्ट या टाटा संस, 158 साल पुराने टाटा ग्रुप का असली मालिक कौन; क्यों छिड़ी दोनों में रार?

Published: Thu, 17 Sep 2026 11:04 PM (IST)

टाटा ग्रुप में एन चंद्रशेखरन के कार्यकाल विस्तार को लेकर आंतरिक कलह छिड़ गई है, जहां टाटा संस बोर्ड ने ...और पढ़ें

टाटा ग्रुप के स्वामित्व और प्रबंधन को लेकर गहराया विवाद।

टाटा ग्रुप के स्वामित्व और प्रबंधन को लेकर गहराया विवाद।

HighLights

  1. एन चंद्रशेखरन के कार्यकाल विस्तार पर टाटा ट्रस्ट्स का विरोध।

  2. टाटा संस बोर्ड ने 5 साल के लिए कार्यकाल बढ़ाने को दी मंजूरी।

  3. टाटा ग्रुप के स्वामित्व और प्रबंधन को लेकर गहराया विवाद।

बिजनेस डेस्क, नई दिल्ली। टाटा ग्रुप इस समय आंतरिक कलह से जूझ रहा है। गुरुवार को टाटा संस के बोर्ड ने एन चंद्रशेखरन के कार्यकाल को 5 साल और बढ़ाने की मंजूरी दी। लेकिन टाटा ट्रस्ट्स के चेयरमैन नोएल टाटा इसके खिलाफ हैं। टाटा संस के सबसे बड़े शेयरधारक ने इस एन. चंद्रशेखरन के प्रस्ताव बढ़ाने वाली मंजूरी तुरंत खारिज करते हुए कहा कि उनका मौजूदा कार्यकाल 20 फरवरी 2027 तक है और उसी तारीख तक रहेगा। मालूम हो कि 12 अगस्त को एन चंद्रशेखरन ने अपने पद से इस्तीफा दिया था और कहा था कि अब वह आगे अपना कार्यकाल नहीं बढ़ाना चाहते। लेकिन बोर्ड के अनुरोध करने के बाद उन्होंने अपने फैसले पर पुनर्विचार किया। दूसरी ओर, टाटा ट्रस्ट्स ने टाटा संस के फैसले का विरोध किया है। इससे टाटा ग्रुप में नेतृत्व को लेकर चल रहा विवाद और गहरा गया है।

एन चंद्रशेखरन के इस्तीफे के एक महीने बाद ही टाटा संस बोर्ड ने उनके कार्यकाल को 5 और साल बढ़ाने की मंजूरी दी। वोटिंग में नोएल टाटा अकेले पड़ गए। और उन्होंने इस प्रस्ताव का खुलकर विरोध किया। इस घमासान के बीच ये जानना जरूरी है कि आखिर टाटा समूह को चलाना कौन है और इसका मालिक कौन है और क्यों टाटा संस और टाटा ट्रस्ट्स के बीच घमासान मचा हुआ है। आइए इस एक्सप्लेनर में पूरी कहानी समझते हैं।

टाटा ग्रुप का मालिक कौन है?

जमशेदजी नुसरवानजी टाटा ने 1868 में टाटा ग्रुप की शुरुआत एक प्राइवेट ट्रेडिंग फर्म के तौर पर की थी। यह भारत का सबसे पुराने बिजनेस ग्रुपों में से एक है। आज यह समूह अलग-अलग सेक्टर में कारोबार करता है। इसके कारोबार कई तरह के उद्योगों में फैले हुए हैं, जिनमें ऑटोमोबाइल, स्टील, सॉफ्टवेयर, एयरलाइंस और होटल शामिल हैं। इस ग्रुप में 32 कंपनियां हैं, जिनमें से 26 कंपनियां लिस्टेड हैं। मार्च 2026 में खत्म हुए 12 महीनों में इन सभी कंपनियों ने मिलकर लगभग 170 अरब डॉलर का रेवेन्यू कमाया।

ग्रुप की ज्यादातर हिस्सेदारी टाटा परिवार से जुड़ी परोपकारी संस्थाओं यानी टाटा ट्रस्ट्स के पास है। ये ट्रस्ट शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार और कला-संस्कृति जैसे क्षेत्रों में काम करते हैं। और यही ट्रस्ट्स कहीं न कहीं टाटा ग्रुप को मैनेज करते हैं।

टाटा ग्रुप की कंपनियों को चलाने वाली एक प्रमुख कंपनी है। उसका नाम टाटा संस है। टाटा संस में टाटा ट्रस्ट्स की 66 फीसदी हिस्सेदारी है। यानी टाटा संस का सबसे बड़ा शेयरधारक टाटा ट्रस्ट्स है। इन ट्रस्ट्स में सर दोराबजी टाटा ट्रस्ट और सर रतन टाटा ट्रस्ट की हिस्सेदारी सबसे महत्वपूर्ण है। दोनों ट्रस्ट मिलकर टाटा संस की 51.54 फीसदी हिस्सेदारी रखते हैं।

इस हिस्सेदारी का यह मतलब नहीं कि टाटा परिवार का कोई सदस्य व्यक्तिगत तौर पर इन शेयरों का मालिक है। ये शेयर संबंधित चैरिटेबल ट्रस्ट्स के नाम पर हैं और उनका प्रबंधन ट्रस्टियों के बोर्ड द्वारा किया जाता है।

सर रतन टाटा ट्रस्ट में 5 ट्रस्टी हैं, जिनके नाम निम्नलिखित हैं-

  1. नोएल एन. टाटा
  2. वेणु श्रीनिवासन
  3. जिमी एन. टाटा
  4. जहांगीर एच.सी. जहांगीर
  5. डेरियस खंबाटा

सर दोराबजी टाटा ट्रस्ट में ये 6 ट्रस्टी हैं, जिनके नाम निम्नलिखित हैं-

  1. नोएल एन. टाटा
  2. वेणु श्रीनिवासन
  3. विजय सिंह
  4. डेरियस खंबाटा
  5. नेविल एन टाटा
  6. भास्कर भट्ट

इन ट्रस्ट्स के प्रमुख नोएल टाटा हैं। उन्होंने यह जिम्मेदारी अक्टूबर 2024 में अपने सौतेले भाई रतन टाटा के निधन के बाद संभाली।

सोर्स- https://www.tatatrusts.org/about-tatatrusts/sdtt-board-of-trustees

कौन चलाता है टाटा समूह

टाटा ग्रुप के तहत चलने वाली कंपनियां अपने-अपने बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स के तहत स्वतंत्र रूप से काम करती हैं। टाटा संस ग्रुप की प्रमुख निवेश होल्डिंग कंपनी है और कई बड़े कारोबारों के केंद्र में है। टाटा संस का एक चेयरमैन होता है जो ग्रुप की सभी कंपनियों को चलाने का काम करता है। और इस समय इस पद पर एन चंद्रशेखरन हैं। वह टाटा संस के एग्जीक्यूटिव चेयरमैन के तौर पर अपनी दूसरा कार्यकाल पूरा करने वाले हैं। उनका दूसरा कार्यकाल 20 फरवरी 2027 को खत्म होगा। टाटा संस ने मार्च 2026 को खत्म हुए साल में 42,367 करोड़ रुपये (4.46 अरब डॉलर) का रेवेन्यू दर्ज किया।

टाटा संस के बोर्ड में छह सदस्य होते हैं। नीचे सभी सदस्यों के नाम दिए गए हैं-

  1. एन चंद्रशेखरन (चेयरमैन)
  2. नोएल टाटा (नॉन-एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर और टाटा ट्रस्ट्स के चेयरमैन)
  3. वेणु श्रीनिवासन – नॉन-एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर (टाटा ट्रस्ट्स के नॉमिनी)
  4. हरीश मनवानी - स्वतंत्र निदेशक
  5. अनीता एम. जॉर्ज – स्वतंत्र निदेशक
  6. सौरभ अग्रवाल – कार्यकारी निदेशक

एन चंद्रशेखरन को लेकर क्यों हुआ विवाद?

एन. चंद्रशेखरन को 12 जनवरी, 2017 को टाटा संस का एग्जीक्यूटिव चेयरमैन नियुक्त किया गया और उन्होंने 21 फरवरी, 2017 को आधिकारिक तौर पर कार्यभार संभाला। इससे पहले वह करीब तीन दशक तक टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (TCS) से जुड़े रहे और कंपनी के सीईओ भी रहे।

12 अगस्त को चंद्रशेखरन ने कहा था कि उनका मौजूदा कार्यकाल फरवरी 2027 में खत्म होने के बाद वह पद छोड़ देंगे। इसके बाद टाटा संस के बोर्ड ने उनके कार्यकाल को आगे बढ़ाने पर चर्चा की। गुरुवार को हुई करीब तीन घंटे की बैठक में बोर्ड ने बहुमत से उन्हें पांच साल के लिए दोबारा नियुक्त करने का प्रस्ताव पारित कर दिया। लेकिन टाटा ट्रस्ट्स के चेयरमैन नोएल टाटा ने इस प्रस्ताव के खिलाफ वोट किया।

टाटा ट्रस्ट्स ने क्यों उठाए सवाल?

टाटा ट्रस्ट्स का कहना है कि चंद्रशेखरन का 12 अगस्त को पद छोड़ने का फैसला पहले ही स्वीकार किया जा चुका था और अब वह अंतिम माना जाना चाहिए। ट्रस्ट्स ने यह भी कहा कि नए चेयरमैन की तलाश के लिए चयन समिति बनाने का अनुरोध पहले ही किया जा चुका था।

ट्रस्ट्स के मुताबिक, टाटा संस के आर्टिकल्स ऑफ एसोसिएशन के तहत चेयरमैन से जुड़े ऐसे प्रस्ताव के लिए ट्रस्ट्स द्वारा नामित दोनों निदेशकों का समर्थन जरूरी है। चूंकि नोएल टाटा ने प्रस्ताव का विरोध किया, इसलिए ट्रस्ट्स ने बोर्ड के फैसले को कानूनी रूप से अमान्य बताया है।

नोएल टाटा ने बोर्ड के सामने पूर्व मुख्य न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़ की कानूनी राय का भी हवाला दिया। हालांकि, टाटा ट्रस्ट्स के अनुसार बोर्ड ने इस राय को ध्यान में नहीं रखा।

टाटा संस की लिस्टिंग को लेकर भी रार

एन. चंद्रशेखरन और नोएल टाटा के बीच मचे बवाल के बीच टाटा संस के बोर्ड ने अपनी लिस्टिंग के लिए जरूरी कदम उठाने का फैसला किया है। बोर्ड ने ग्रुप के नमक से लेकर सॉफ्टवेयर और कारों तक के बिजनेस की होल्डिंग कंपनी, टाटा संस की लिस्टिंग की प्रक्रिया को आगे बढ़ाने पर सहमति जताई।

टाटा संस ने एक बयान में कहा, "बोर्ड ने RBI के लागू नियमों का पालन करने के लिए कदम उठाने का भी फैसला किया है और नियमों के पालन से जुड़ी जरूरतों पर RBI, टाटा ट्रस्ट और दूसरे स्टेकहोल्डर्स से सलाह लेगा।"

इसके बाद कंपनी को आरबीआई के नियमों के तहत आगे बढ़ना होगा, जिनमें टाटा संस की सार्वजनिक लिस्टिंग की आवश्यकता शामिल है। टाटा संस के बोर्ड ने अब संबंधित नियमों के पालन के लिए कदम उठाने का फैसला किया है और आरबीआई, टाटा ट्रस्ट्स तथा अन्य हितधारकों से अनुपालन को लेकर मार्गदर्शन लेने की बात कही है।

इस तरह टाटा ग्रुप में फिलहाल दो बड़े मुद्दे सामने हैं एन चंद्रशेखरन के भविष्य को लेकर टाटा ट्रस्ट्स और बोर्ड के बीच मतभेद तथा टाटा संस की प्रस्तावित लिस्टिंग। आने वाले समय में इन दोनों मामलों पर होने वाले फैसले टाटा ग्रुप की कॉरपोरेट संरचना और नेतृत्व के लिए महत्वपूर्ण हो सकते हैं।

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