नई दिल्ली: रिटायरमेंट बॉडी कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (ईपीएफओ), ईपीएफ एंड एमपी एक्ट में उस संशोधन के प्रस्ताव पर विचार करेगी, जिसमें अपेरल और मेड-अप सेक्टर के कर्मचारियों के लिए भविष्य निधि योगदान वैकल्पिक बनाने का विचार सामने रखा गया है। यह प्रस्ताव गुरुवार को हुई ट्रस्टी मीट में सामने रखी गई है।

हालांकि, ट्रेड यूनियन इस कदम के खिलाफ है। उनका कहना है कि इससे अन्य क्षेत्रों के साथ-साथ भविष्य में ऐसी छूट भी मिल जाएगी और यह फैसला सेवानिवृत्त बचत के उद्देश्य को खत्म कर सकता है।

एक सूत्र के मुताबिक कैबिनेट के फैसले को लागू करने के लिए अधिनियम में संशोधन, जिसमें 15,000 रुपए प्रतिमाह की कमाई करने वाले लोगों के लिए ईपीएफ के योगदान को वैकल्पिक बनाए जाने का प्रस्ताव 30 मार्च, 2017 को निर्धारित ईपीएफओ के न्यासियों की बैठक के एजेंडे में सूचीबद्ध है।

इससे पहले बीते साल जून महीने में केंद्र ने कपड़ा और परिधान क्षेत्र के लिए एक पैकेज जारी किया था, जिसे बाद में दिसंबर 2016 में भी बढ़ाया गया था। इस विशेष पैकेज के साथ मिलने वाली अन्य सुविधाओं में, यह घोषणा की गई थी कि EPF को इन क्षेत्रों में प्रति माह 15,000 रुपये से कम कमाई वाले कर्मचारियों के लिए वैकल्पिक बनाया जाएगा।

हालांकि यह एक मंत्रिमंडलीय निर्णय था, लेकिन यह ईपीएफ और एमपी अधिनियम 1952 में संशोधन किए बिना लागू नहीं किया जा सकता है।

Posted By: Praveen Dwivedi