नई दिल्ली (बिजनेस डेस्क)। डीजीसीए ने इंडिगो और गो एयर के ए-320 नियो श्रेणी के 11 विमानों को ग्राउंड करने का फैसला किया है। यानी फिलहाल इन विमानों का इस्तेमाल उड़ान के लिए नहीं किया जा सकेगा। विमानन नियामक ने यह निर्णय इनमें प्रयुक्त ह्विटनी इंजन के बार-बार फेल होने तथा यात्रियों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए लिया है।

उक्त 11 विमानों में इंडिगो के नौ तथा गो एयर के दो विमान शामिल हैं। इंडिगो के तीन नियो विमान पहले ही ग्राउंड किए जा चुके हैं। पिछले एक माह में उड़ान के दौरान इन विमानों के इंजन आकाश में तीन बार अचानक बंद हो चुके हैं। सोमवार को अहमदाबाद एयरपोर्ट पर इंडिगो के नियो विमान का इंजन फेल होने और विमान की इमरजेंसी लैंडिंग कराए जाने के बाद डीजीसीए को कड़ा रुख अपनाना पड़ा। डीजीसीए के मुताबिक कई बार गड़बड़ी के बावजूद अब तक इस समस्या के समाधान की कोई ठोस पहल सामने नहीं आई है।

इस समय इंडिगो के पास ए-320 नियो सीरीज के 11 तथा गो एयर के पास तीन विमान हैं। इनमें ह्विटनी की खास सीरीज के इंजनों का उपयोग किया गया है। ये सभी अब उड़ान के लिए अयोग्य करार दिए जा चुके हैं। डीजीसीए ने इंडिगो तथा गो एयर दोनों को नए इंजन लगाने से भी मना किया है। दोनों एयरलाइनों के पास इसी सीरीज के दूसरे इंजन स्टॉक में हैं।

इंडिगो के एक अधिकारी ने कहा, ‘हमें डीजीसीए से जो निर्देश मिले हैं उनका तुरंत पालन किया जाएगा। निर्देश के अनुपालन के परिणामस्वरूप इंडिगो के कुल नौ ए-320 नियो विमान ग्राउंड होंगे। हालांकि डीजीसीए ने ग्राउंड होने वाले विमानों की संख्या आठ बताई है।’

दूसरी ओर गो एयर का कहना है कि डीजीसीए के निर्देश के चलते उसके सभी पीडब्ल्यू जीटीएफ इंजन ग्राउंड हो जाएंगे, लेकिन ग्राहकों को असुविधा न हो इसका पूरा प्रयास किया जाएगा।

इंडिगो और गो एयर के विमानों की उड़ान पर रोक से इन एयरलाइनों के ऑपरेशन पर असर पड़ने की आशंका है। डीजीसीए की ओर से किसी विमान को उड़ान से रोकने का निर्णय अपरिहार्य स्थितियों में ही लिया जाता है। पिछले एक दशक में केवल तीन बार ऐसा हुआ है। इससे पहले 1990 में एयर इंडिया के ए-320 विमान के दुर्घटनाग्रस्त होने के बाद उसके द्वारा प्रयुक्त सभी ए-320 विमानों को ग्राउंड किया गया था। इसके बाद 2013 में एयर इंडिया के बोइंग 737 विमानों की लीथियम बैट्री में खराबी की घटनाओं के बाद इन विमानों की उड़ानों पर रोक लगाई गई थी। बाद में इन सभी मामलों में रोक हटा दी गई थी।

डीजीसीए के अनुसार ह्विटनी ने कहा है कि सभी प्रभावित इंजनों को जून, 2018 तक बदल दिया जाएगा। लेकिन अभी तक 450 सीरियल नंबर के इंजनों के बारे में कोई ठोस प्रस्ताव नहीं मिला है।

 

By Shubham Shankdhar