नई दिल्ली (पीटीआइ)। बुधवार को प्रधानमंत्री के आर्थिक सलाहकार परिषद ने मोदी सरकार के पूर्व मुख्य आर्थिक सलाहकार (सीईए) अरविंद सुब्रमण्यन के वित्त वर्ष 2011-12 से 2016-17 के बीच भारत के जीडीपी ग्रोथ रेट को बढ़ा-चढ़ाकर पेश करने के दावे का खंडन किया है। परिषद की ओर से कहा गया है कि अरविंद सुब्रमण्यन के दावे का समय आने पर सिलसिलेवार ढंग से खंडन किया जाएगा।

बता दें कि अरविंद सुब्रमण्यन ने अपने ताजा रिसर्च पेपर में दावा किया है कि वित्त वर्ष 2011-12 से 2016-17 के बीच भारत का जीडीपी ग्रोथ रेट 2.5 फीसद तक बढ़ाकर बताया गया था। उन्होंने कहा कि वित्त वर्ष 2011 और 2016 के दौरान जीडीपी में 6.9 फीसद की वृद्धि का दावा किया गया था, लेकिन पूरी संभावना है कि उस दौरान ग्रोथ रेट 3.5 से 5.5 फीसद रहा हो।

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आर्थिक सलाहकार परिषद की ओर से जारी एक बयान में कहा गया कि सुब्रमण्यन के कागज में किए गए अनुमानों की विस्तार से जांच की गई और तय समय में बिंदु-दर-बिंदु इसका खंडन किया गया।

बयान के मुताबिक, 'फिलहाल, यही महसूस किया गया है कि भारत की सांख्यिकी प्रणालियों की स्वतंत्रता और गुणवत्ता को बरकरार रखने के उद्देश्य से अकादमिक बहस में जाकर किसी तरह की सनसनी फैलाने का प्रयास करने की जरूरत नहीं है और इन सबसे पूर्व सीईए अच्छी तरह अवगत हैं।' 

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ईएसी-पीएम ने कहा, 'ये मसले हैं, जिन्हें डॉ. सुब्रमण्यन ने सीईए रहने के दौरान निश्चित तौर पर उठाए होंगे, हालांकि अपनी स्वीकारोक्ति से उन्होंने साबित कर दिया है कि भारत के जीडीपी के आंकड़ों को समझने में उन्होंने काफी वक्त लिया और अभी भी अनिश्चितता की स्थिति में हैं। 

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Posted By: Nitesh

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