नई दिल्ली (बिजनेस डेस्क)। पिछले कुछ महीनों में नियो श्रेणी के विमानों के बीच हवा में इंजन फेल होने की कई घटनाएं सामने आई हैं। सोमवार को इंडिगो की अहमदाबाद-लखनऊ फ्लाइट के विमान का इंजन बीच हवा में फेल हो गया था। इससे पहले पांच मार्च को भी इंडिगो के एक विमान की टेक-ऑफ के तुरंत बाद मुंबई में इमरजेंसी लैंडिंग करानी पड़ी थी। इसी तरह पिछले महीने गो एयर के विमान का पीडब्ल्यू इंजन भी लेह से उड़ान भरने के बाद बीच हवा में बंद हो गया था।

प्राय: विमानों के मिड एयर इंजन फेल होने की घटनाएं असाधारण होती हैं। पिछले एक-डेढ़ साल की घटनाओं को छोड़ दिया जाए तो तीन दशकों में पूरी दुनिया में केवल 25 ऐसी घटनाएं सामने आई हैं यानी 10 लाख उड़ानों में एक। यही वजह है कि इंडिगो और गो एयर विमानों में इंजन विफलता को शुरू में नागरिक उड्डयन नियामक डीजीसीए ने बहुत गंभीरता से नहीं लिया। डीजीसीए तब जागा जब नौ फरवरी को यूरोपीय विमानन नियामक ने पीडब्ल्यू 1100 इंजनों को लेकर गंभीर रुख अपनाया। साथ ही मुंबई हाईकोर्ट में नियो विमानों की उड़ानों पर रोक लगाने की मांग वाली याचिका पर कोर्ट ने डीजीसीए को कदम उठाने के आदेश दिए।

सूत्रों के अनुसार एयरबस अपने ए-320 नियो विमानों में दो ब्रांड के इंजन इस्तेमाल करती है। इंडिगो तथा गो एयर को बेचे गए विमानों में पीडब्ल्यू 1100जी-जेएम इंजन समेत पैट्र एंड ह्विटनी के कुछ अन्य श्रेणियों के इंजन लगे हैं। वहीं, विस्तारा और एयर इंडिगो को सप्लाई किए गए इंजनों में सीएफएम लीप-1 इंजन का प्रयोग किया गया है।

By Surbhi Jain