नई दिल्‍ली, पीटीआइ। सरकार PSU कंपनियों के विनिवेश कार्यक्रम के बाद अब उनके परिसर में पड़ी सरप्‍लस जमीन और इमारतों से भी सरकारी खजाना भरेगी। बुधवार को केंद्रीय कैबिनेट ने इसके लिए राष्ट्रीय भूमि मौद्रिकरण निगम (National Land Monetisation Corp, NLMC) के गठन की मंजूरी दे दी। कैबिनेट नोट के मुताबिक सरकार की योजना सार्वजनिक उपक्रमों के भवनों और सरकारी एजेंसियों से मौद्रिकरण करने की है।

बंद हो चुके PSU की जमीन का होगा इस्‍तेमाल

कैबिनेट नोट के मुताबिक सरकार की मंशा उन PSU (Public Sector Undertaking) की जमीन और इमारत का इस्‍तेमाल मौद्रिकरण करने के लिए है, जो बंद हो चुके हैं या फिर बंद होने वाले हैं।

150 करोड़ रुपये की चुकता शेयर पूंजी के साथ शुरू होगी कंपनी

एक आधिकारिक बयान में कहा गया है कि एनएलएमसी को 5,000 करोड़ रुपये की प्रारंभिक अधिकृत शेयर पूंजी और 150 करोड़ रुपये की चुकता शेयर पूंजी के साथ भारत सरकार की पूर्ण स्वामित्व वाली कंपनी के रूप में स्थापित किया जाएगा।

सरप्‍लस जमीन और बिल्डिंग का मौद्रिकरण

बयान में कहा गया है कि NLMC केंद्रीय सार्वजनिक क्षेत्र के उद्यमों (सीपीएसई) और अन्य सरकारी एजेंसियों की सरप्‍लस जमीन और बिल्डिंग का मौद्रिकरण करेगी। गैर-प्रमुख संपत्तियों के मौद्रिकरण के साथ सरकार कम इस्‍तेमाल की गई संपत्तियों का मौद्रिकरण करके पर्याप्त राजस्व बनाने में सक्षम होगी। वर्तमान में CPSE के पास जमीनों और इमारतों की प्रकृति में काफी सरप्‍लस और कम उपयोग की गई गैर-प्रमुख संपत्तियां हैं।

कीमत को अनलॉक करने के लिए जरूरी

रणनीतिक विनिवेश या बंद होने वाले सीपीएसई के लिए इन सरप्‍लस जमीन और गैर-प्रमुख संपत्तियों का मौद्रिकरण उनकी कीमत को अनलॉक करने के लिए जरूरी है। एनएलएमसी इन परिसंपत्तियों के मौद्रिकरण का सपोर्ट और कामकाज देखेगी।

प्राइवेट इन्‍वेस्‍टमेंट को बढ़ावा

यह निजी क्षेत्र के निवेश, नई आर्थिक गतिविधियों, स्थानीय अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देने और आर्थिक और सामाजिक बुनियादी ढांचे के लिए फाइनेंशियल सपोर्ट बनाने के लिए इन कम इस्‍तेमाल की गई संपत्तियों के प्रोडक्टिव इस्‍तेमाल को भी सक्षम बनाएगा।

Edited By: Ashish Deep

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