नई दिल्ली, बिजनेस डेस्क। जब पूरा यात्रा और पर्यटन क्षेत्र आर्थिक मंदी से जूझ रहा है, तो प्रकाश की पहली किरण डिजिटल प्लेटफॉर्म्स से दिखाई दी है, जो इस सेक्टर के पुनरुद्धार में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। इंटरनेट एंड मोबाइल एसोसिएशन ऑफ इंडिया  (IAMAI) द्वारा आयोजित 'पर्यटन क्षेत्र में डिजिटल रोडमैप से माइक्रो-एंटरप्रेन्योर्स में मजबूती' विषय पर आयोजित वेबीनार में सभी पैनलिस्ट्स की ओर से यह एक महत्वपूर्ण संदेश था।

कार्यक्रम में बोलते हुए मीनाक्षी शर्मा, महानिदेशक (पर्यटन) ने कहा कि पर्यटन क्षेत्र का जीडीपी में 5 फीसद योगदान होता है, इसलिए इस सेक्टर में मंदी का अर्थव्यवस्था पर काफी प्रभाव पडे़गा। शर्मा ने अपने संबोधन में सरकार द्वारा इस सेक्टर को उबारने के लिए किये गए विभिन्न प्रयासों का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि घरेलू पर्यटन रिकवरी के लिए रीढ़ की हड्डी बनने जा रहा है।  

वेबीनार में बोलते हुए मनीष अमीन, सह संस्थापक और सीआईओ (यात्रा) ने घरेलू पर्यटन के महत्व को दोहराया और इस बारे में प्रकाश डाला कि किस तरह यह आने वाले समय में क्षेत्र को आगे ले जाने में मदद करेगा।

इस वेबीनार में "होमस्टे इन इंडिया: ए फंक्शनल एंड इकोनॉमिक इम्पैक्ट एनालिसिस" नामक रिपोर्ट भी लॉन्च की गई। इस रिपोर्ट में बताया गया है साल 2019 में भारतीय अर्थव्यवस्था में होम्सस्टे का योगदान 2600 करोड़ का था। रिपोर्ट के अनुसार, भारत में होम्सस्टे सेक्टर को विकसित करने में डिजिटल प्लेटफॉर्म्स का अभूतपूर्व योगदान रहा है। करीब 90 फीसद होमस्टे मालिकों ने ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स के माध्यम से ग्राहकों तक पहुंच बढ़ाने में सफलता पायी है।

रिपोर्ट के अनुसार, करीब 75 फीसद होमस्टे मेजबान अपने घरों में पर्यटकों का स्वागत करते हैं, जहां वे परिवारों के साथ रहते हैं और लगभग 50% के लिए यह आय का प्राथमिक या एकमात्र स्रोत है। इस प्रकार होमस्टे ग्रामीण अर्थव्यवस्था के लिए काफी महत्वपूर्ण है और सरकार को माइक्रो-उद्यमियों को होमस्टे का समर्थन करने के लिए विशेष प्रोत्साहन प्रदान करना चाहिए।

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