नितिन प्रधान, नई दिल्ली। कच्चे माल और उससे तैयार होने वाले उत्पाद में ड्यूटी की दर में फर्क के चलते सरकार को हर साल 20000 करोड़ रुपये का रिफंड देना होगा। ऐसे करीब दो दर्जन वस्तुएं हैं जिनके कच्चे माल पर जीएसटी की दर अधिक है जबकि तैयार माल पर ड्यूटी की दर कम है। जीएसटी के टैक्स स्ट्रक्चर में इस असंतुलन को दूर करने के संबंध में काउंसिल अपनी अगली बैठक में विचार कर सकती है। इस तरह के ड्यूटी स्ट्रक्चर को इनवर्टड ड्यूटी स्ट्रक्चर (आइडीएस) का नाम दिया गया है।

हाल ही में 18 दिसंबर को हुई जीएसटी काउंसिल की 38वीं बैठक के लिए तैयार एक नोट के मुताबिक 'सरकार का अनुमान है कि इस पर सालाना 20000 करोड़ रुपये का रिफंड देना होगा।' इस तरह की सबसे ज्यादा दिक्कत मैन्यूफैक्चरिंग सेक्टर में जीएसटी की निचली दर 5 और 12 परसेंट के दायरे में आने वाले उत्पादों पर आ रही है। इस बात की आशंका जतायी जा रही है कि इस तरह के रिफंड की मांग सर्विस और कैपिटल गुड्स क्षेत्र से भी उठ सकती है। ऐसा होता है तो विवादों और कानूनी मामलों की संख्या में वृद्धि हो सकती है।

सूत्र बताते हैं कि आम बजट के बाद होने वाली जीएसटी काउंसिल की बैठक में इसका समाधान तलाशने पर विचार हो सकता है।काउंसिल के नोट में ऐसे करीब दो दर्जन उत्पादों का जिक्र है जिनके निर्माण में इस्तेमाल होने वाले कच्चे माल पर जो जीएसटी की ऊंची दर है जबकि तैयार माल पर टैक्स की दर कम है। इनमें मोबाइल फोन, फुटवियर, फैब्रिक्स, मैन मेड यार्न, रेडीमेड गारमेंट्स, फर्टिलाइजर, रिन्यूवल इक्विपमेंट्स, ट्रैक्टर्स, फार्मा, जेनरेटर समेत कई उत्पाद शामिल हैं। इन उत्पादों की मैन्यूफैक्चरिंग में कंपनियों को कच्चे माल पर जीएसटी की ऊंची दर से भुगतान करना पड़ता है। लेकिन कंपनियां जब तैयार माल को बाजार में बेचती हैं तो उन पर ड्यूटी की दर कम होती है।

कच्चे माल और तैयार माल पर लागू जीएसटी की दर के अंतर की भरपाई के लिए जीएसटी में प्रावधान है। इसके तहत जीएसटी में पंजीकृत कंपनी या व्यक्ति इस अंतर की वजह से बचे रह गये इनपुट टैक्स क्रेडिट का इनवर्टड ड्यूटी स्ट्रक्चर के के तहत साल के अंत में रिफंड का दावा कर सकती है। टैक्स एक्सपर्ट कंपनी डेलॉयट इंडिया के पार्टनर एमएस मणि का मानना है कि इस समस्या के निदान के लिए सभी दरों के लिए टैक्स की एक दर का प्रावधान करना होगा। लेकिन अंतरिम राहत केवल यही हो सकती है कि इसके रिफंड के सिस्टम में तेजी लायी जाए ताकि कंपनियों की वर्किग कैपिटल में पूंजी का प्रवाह बना रह सके।

 

इंडियन टी20 लीग

डाउनलोड करें जागरण एप और न्यूज़ जगत की सभी खबरों के साथ पायें जॉब अलर्ट, जोक्स, शायरी, रेडियो और अन्य सर्विस