नई दिल्ली, जागरण ब्यूरो। भारत सरकार के मुख्य आर्थिक सलाहकार के. सुब्रमण्यन ने कहा है कि वित्तीय क्षेत्र के विकास के बगैर कोई भी देश लंबे समय तक तेज गति से विकास नहीं कर सकता है। उन्होंने कहा कि वित्तीय क्षेत्र में आर्थिक विकास को आगे ले जाने की क्षमता होती है। अगर वित्तीय क्षेत्र की विकास दर 1.5 फीसद होगी तब अर्थव्यवस्था की विकास दर एक फीसद होगी। उन्होंने कहा कि हमारे वित्तीय क्षेत्र खासकर बैंक व एनबीएफसी को अभी लंबा सफर तय करना है।

औद्योगिक संगठन फिक्की के एक कार्यक्रम में मुख्य आर्थिक सलाहकार ने कहा कि 1980 के दशक में जब जापान की अर्थव्यवस्था का सचमुच में विकास हो रहा था, तब विश्व के टॉप 25 बैंकों में 18 बैंक जापान के थे। उन्होंने कहा कि आज के समय में दुनिया के टॉप 100 बैंकों में 18 बैंक चीन के हैं और दुनिया की पांचवीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था भारत का सिर्फ एक बैंक एसबीआइ टॉप 100 बैंकों में शुमार हैं। एसबीआइ 55वें पायदान पर है। उन्होंने कहा कि भारत का वित्तीय क्षेत्र 1990 की क्रिकेट टीम जैसा है जिसकी घरेलू उपलब्धियों पर तो काफी कुछ लिखा जा सकता है, लेकिन देश से बाहर के प्रदर्शन पर लिखने के लिए कुछ खास नहीं है।

सुब्रमण्यन ने कहा कि वित्तीय क्षेत्र और एनबीएफसी को उधार देने के दौरान जोखिम का खास ध्यान रखना चाहिए। उन्होंने कहा कि एनबीएफसी को वैश्विक प्रतिस्पर्धा में आने के लिए आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस (एआइ) डाटा एनालिटिक्स का इस्तेमाल करना चाहिए। वित्तीय क्षेत्र में अभी तकनीक के इस्तेमाल की काफी गुंजाइश है। खुदरा उधारी में तकनीक का इस्तेमाल किया जा रहा है, लेकिन बड़े स्तर की कारपोरेट उधारी में तकनीक का इस्तेमाल नहीं हो पा रहा है।

सुब्रमण्यन ने कहा कि भारत में निजी उधारी का स्तर आर्गेनाइजेशंस फॉर इकोनॉमिक कोपरेशन डेवलपमेंट (ओईसीडी) के अन्य देशों के मुकाबले काफी कम है। उन्होंने कहा कि भारत के वित्तीय सेक्टर को अभी बहुत करना है।

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