नई दिल्ली (बिजनेस डेस्क)। फरवरी महीने में उम्मीद के मुताबिक ही खुदरा महंगाई में इजाफा हुआ और कंज्यूमर प्राइस इंडेक्स (सीपीआई) जनवरी के 1.97 फीसद के मुकाबले बढ़कर 2.57 फीसद हो गया।

हालांकि, इजाफे के बाद भी महंगाई भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के मीडियम टर्म टारगेट 4 फीसद(+-2 %) से नीचे ही है, जिसने अगली बैठक में ब्याज दरों में कटौती की उम्मीद बढ़ा दी है। 4 अप्रैल को होने वाली बैठक में महंगाई नहीं बल्कि ग्रोथ की सुस्त पड़ती रफ्तार को सहारा देना, आरबीआई के एजेंडे में होगा।

पिछली बैठक में आरबीआई ने रेपो रेट को 25 आधार अंक घटाते हुए 6.25 फीसद कर दिया है, जिसका लाभ बैंकों ने भी ब्याज दरों में कटौती कर ग्राहकों को दिया है। एसबीआई समेत कई बैंक ब्याज दरों को घटा चुके हैं।

अर्थशास्त्रियों का मानना है कि आने वाले दिनों में महंगाई में इजाफे की उम्मीद नहीं है, क्योंकि फसल और खाने-पीने के सामान की कीमतों में आई कमी की वजह से ग्रामीण आय में कमी आई है।

गौरतलब है कि फरवरी महीने में महंगाई में इजाफा हुआ है, लेकिन चिंता औद्योगिक उत्पादन के ग्रोथ को लेकर बढ़ गई है। केंद्रीय सांख्यिकी कार्यालय की तरफ से जारी आंकड़ों के मुताबिक जनवरी में औद्योगिक उत्पादन की रफ्तार घटकर 1.7 फीसद हो गई, जो पिछले साल की समान अवधि में 7.5 फीसद थी।

मासिक आधार पर देखा जाए तो दिसंबर में आईआईपी 2.6 फीसद रहा था।

दिसंबर तिमाही में देश की जीडीपी कम होकर 6.6 फीसद हो चुकी है। जीडीपी में आई इस गिरावट के बाद सरकार ने चालू वित्त वर्ष के लिए जीडीपी के लक्ष्य को 7.2 फीसद से घटाकर 7 फीसद कर दिया है।

ऐसे में माना जा रहा है कि 4 अप्रैल की बैठक में आरबीआई के समक्ष महंगाई की बजाए ग्रोथ मुद्दा होगा और वह लगातार दूसरी बार ब्याज दरों में कटौती की राहत दे सकता है।

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Posted By: Abhishek Parashar

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