नई दिल्ली (बिजनेस डेस्क)। आर्थिक मामलों के विशेषज्ञों ने स्टील व एल्यूमीनियम पर आयात शुल्क आयद करने के संयुक्त राज्य अमेरिका (यूएसए) के फैसले के खिलाफ उसे विश्व व्यापार संगठन (डब्ल्यूटीओ) में घसीटने की मांग की है। विशेषज्ञों का कहना है कि अमेरिका डब्ल्यूटीओ नियमों की अवहेलना नहीं कर सकता और उसे संस्था के विवाद निपटारा तंत्र में घसीटा जाना चाहिए।

वाणिज्य मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने भी कहा है कि अगर कोई देश अमेरिका को इस मामले में डब्ल्यूटीओ में घसीटता है, तो भारत तीसरा पक्ष या पर्यवेक्षक बनने के बारे में विचार करेगा। उन्होंने कहा कि मंत्रालय अमेरिका द्वारा स्टील और एल्यूमीनियम उत्पादों पर लगाए उत्पाद शुल्क के प्रभावों का अध्ययन कर रहा है। गौरतलब है कि वर्तमान में भारत हर वर्ष अमेरिका को करीब 13,000 करोड़ रुपये मूल्य के स्टील व एल्यूमीनियम उत्पादों का निर्यात करता है।

पूर्व वाणिज्य सचिव जी. के. पिल्लई ने अमेरिका को डब्ल्यूटीओ में घसीटने के साथ-साथ वहां से भारत में आयात होने वाले बादाम जैसे खाद्य पदार्थों पर भी आयात शुल्क लगाने की मांग की। उन्होंने कहा, "हमें भी शुल्क बढ़ाने की आजादी होनी चाहिए। हमें भी अमेरिका के खिलाफ समान कार्रवाई करनी चाहिए। देश के हितों की रक्षा के लिए इस तरह के कदम उठाए ही जाने चाहिए।"

वहीं, जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय के अर्थशास्त्र विभाग के प्रोफेसर बिश्वजीत धर ने कहा कि अमेरिका का यह फैसला सिर्फ भारत के ही निर्यात को नहीं, बल्कि वैश्विक व्यापार को प्रभावित करेगा। उन्होंने कहा, "भारत को इस आयात शुल्क से बड़ा नुकसान होगा। इसलिए उसे अमेरिका को डब्ल्यूटीओ में घसीटना ही चाहिए।"

फेडरेशन ऑफ इंडियन एक्सपोर्ट ऑर्गनाइजेशंस के महासचिव अजय सहाय ने कहा कि अमेरिका में भारत के बड़े कारोबारी हित निहित हैं। ऐसे में अमेरिका को हल्का झटका देकर छोड़ देने से बात नहीं बनेगी, बल्कि उसे डब्ल्यूटीओ में घसीटा जाना चाहिए।

एल्यूमीनियम कंपनियां बेपरवाह

अमेरिका द्वारा पिछले सप्ताह स्टील और एल्यूमीनियम उत्पादों पर आयात शुल्क लगाने के फैसले को भारतीय एल्यूमीनियम दिग्गजों ने जरा भी तवज्जो नहीं दी है। एल्यूमीनियम एसोसिएशन ऑफ इंडिया के चेयरमैन और सरकारी एल्यूमीनियम कंपनी नाल्को के चेयरमैन व मैनेजिंग डायरेक्टर (सीएमडी) टी. के. चंद ने कहा है कि भारतीय एल्यूमीनियम कंपनियों को अमेरिकी फैसले से कोई उल्लेखनीय असर नहीं पड़ने वाला है।

निजी क्षेत्र की एल्यूमीनियम उत्पादक वेदांता लिमिटेड ने भी कहा कि कंपनी अपने उत्पादन का महज पांच फीसद हिस्सा अमेरिका में निर्यात करती है। ऐसे में अमेरिकी आयात शुल्क से कंपनी बेपरवाह है। वेदांता लिमिटेड के चीफ सेल्स व मार्केटिंग ऑफिसर (ग्लोबल एल्यूमीनियम बिजनेस) ज्यां बैप्टिस्ट ल्यूकास ने कहा कि एल्यूमीनियम का बाजार भाव भी अमेरिकी आयात शुल्क के हिसाब से ही समायोजित हो जाएगा। इसलिए भी कंपनी पर कोई बुरा असर नहीं पड़ेगा। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि डब्ल्यूटीओ के नियमों का उल्लंघन करते हुए अमेरिका ने एकतरफा निर्णय लिया, जिससे अमेरिका में हमारे ग्राहकों पर अतिरिक्त बोझ डालेगा, जिससे उनकी स्पर्धात्मकता प्रभावित होगी।

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