नई दिल्ली, नितिन प्रधान। रीजनल कॉम्प्रहेंसिव इकोनॉमिक पार्टनरशिप (आरसीईपी) को लेकर अब अगले महीने के शुरू में थाइलैंड में होने वाली आसियान की बैठक के बाद तस्वीर स्पष्ट हो पाएगी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इस बैठक में हिस्सा लेंगे और माना जा रहा है कि आसियान देशों के साथ वार्ता के बाद आरसीईपी पर करार का रास्ता साफ हो जाएगा। चीन की तरफ से वियतनाम के रास्ते आयात की आशंका को देखते हुए सरकार इस मामले में सावधानी के साथ आगे बढ़ना चाहती है।

लंबे चिंतन मनन के बाद सरकार ने 16 देशों वाले रीजनल कॉम्प्रहेंसिव इकोनॉमिक पार्टनरशिप (RCEP) का हिस्सा बनने का मन तो बना लिया है, लेकिन अभी कुछ सवाल अनुत्तरित हैं। वाणिज्य व उद्योग मंत्रालय के एक अधिकारी के मुताबिक चीन से होने वाला संभावित आयात चिंता की मुख्य वजह है। यद्यपि आरसीईपी में चीन से आयात के लिए उत्पादों की सूची को काफी छोटा रखा गया है। लेकिन अधिकारियों को इस बात का डर है कि वियतनाम समेत आसियान के जिन देशों में चीन ने मैन्युफैक्चरिंग में निवेश कर रखा है, वहां से उन उत्पादों का भारी मात्र में आयात हो सकता है।

सूत्र बताते हैं कि आरसीईपी को लेकर मंत्रालय में हो रही बैठकों में उद्योग प्रतिनिधि निरंतर इस बात की आशंका व्यक्त कर रहे हैं। उनका मानना है कि इसका सीधा असर ऐसे उत्पादों से जुड़े घरेलू मैन्युफैक्चरर्स पर होगा। सूत्र बताते हैं कि अधिकारियों को इस बात का जवाब अभी नहीं मिल पा रहा है कि इस तरह के आयात की पहचान कैसे होगी। इसका उत्तर खोजने की मशक्कत में वाणिज्य मंत्रालय के अधिकारी अब भी जुटे हुए हैं।

इतना ही नहीं विचार विमर्श के दौरान इस बात की आशंका भी व्यक्त की गई है कि व्यापार समझौतों के बाद भारत को नए निर्यात बाजार मिलते हैं तो भारतीय निर्यात तो बढ़ेगा ही, लेकिन एक डर उन देशों से आयात में वृद्धि का भी है। इन देशों से बड़ी मात्र में ऐसे सामान का आयात हो सकता है जो घरेलू उद्योग को गैर प्रतिस्पर्धी बना सकता है।

सूत्र बताते हैं कि तीन-चार नवंबर को होने वाले आसियान के शिखर सम्मेलन से पहले आसियान देशों की एक मंत्रिस्तरीय बैठक में आरसीईपी को लेकर चर्चा हो सकती है। इस महीने के अंत में होने वाली बैठक के बाद ही भारत का रुख स्पष्ट होगा। गौरतलब है कि आरसीईपी में आसियान के दस देशों के अतिरिक्त चीन, भारत, ऑस्ट्रेलिया, न्यूजीलैंड, दक्षिण कोरिया और जापान सदस्य होंगे।

Posted By: Manish Mishra

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