डालमियानगर का चौंकाने वाला इतिहास: साधु की भविष्यवाणी से उद्योगपति बने आरके डालमिया, फिर कैसे हुए बर्बाद? पूरी कहानी
Dalmianagar Story: उद्योगपति रामकृष्ण डालमिया ने 1930 के दशक में बिहार के रोहतास जिले में डालमियानगर की स्थापना की थी। ...और पढ़ें

HighLights
रामकृष्ण डालमिया ने 1930 के दशक में डालमियानगर बसाया था।
साधु की भविष्यवाणी से चांदी में भारी मुनाफा कमाया।
धोखाधड़ी के आरोप में जेल जाने से साम्राज्य ढह गया।
बिजनेस डेस्क, नई दिल्ली। भारत में कई शहर ऐसे हैं, जो अलग-अलग उद्योगपतियों के नाम पर रखे गए हैं। इस लिस्ट में मोदीनगर (Modinagar History) , जमशेदपुर (Jamshedpur History) और डालमियानगर शामिल हैं। मोदीनगर का इतिहास तो कई लोग जानते हैं। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि डालमियानगर की कहानी क्या है? अगर नहीं, तो चलिए आज बताते हैं कि डालमियानगर कैसे बसाया गया और किसने बसाया।
इस उद्योगपति के नाम पर है शहर
डालमियानगर फेमस उद्योगपति और डालमिया ग्रेप के फाउंडर रामकृष्ण डालमिया (Dalmia Group Founder) के नाम पर है और इसे उन्होंने ही 1930 के दशक में बसाया था। इस शहर की स्थापना 1930 के दशक में उद्योगपति रामकृष्ण डालमिया ने बिहार के रोहतास जिले में सोन नदी के किनारे डेहरी-ऑन-सोन के पास की थी।
क्या था पहला बिजनेस?
डालमिया कलकत्ता से बिहार आए और पटना के बिहटा में साल 1932 में शुगर मिल स्थापित की। उन्होंने पहली कंपनी का नाम रखा साउथ बिहार शुगर मिल्स लिमिटेड। खास बात ये है कि उस समय वो देश की सबसे बड़ी चीनी मिला थी।
राजस्थान के चिड़ावा में साधारण परिवार में जन्मे डालमिया ने यहीं से एक विशाल औद्योगिक समूह खड़ा करने की नींव रखी, जो पहले कमोडिटीज के छोटे-मोटे व्यापारी हुआ करते थे।
घरवालों से भी मिला साथ
आरके डालमिया के साथ उनके छोटे भाई जयदयाल डालमिया और दामाद साहू शांति प्रसाद जैन ने भी डालमियानगर को बसाने में अहम भूमिका निभाई थी। जब डालमिया कोलकाता अपने मामा के पास आए तो उन्होंने बुलियन मार्केट (सोने-चांदी का बाजार) में एक सेल्समैन के तौर पर कदम रखा। जल्द ही उन्हें इस बाजार की लत लग गई। फिर एक समय ऐसा आया जब उनके पैसे खत्म हो गए, और लोगों ने उन पर भरोसा भी खो दिया था।
फिर अचानक हुआ प्रॉफिट
डालमिया के जीवन में टर्निंग पॉइंट तब आया जब एक साधु ने उन्हें देखकर कहा कि वे एक हफ्ते के भीतर अमीर हो जाएंगे। इसके ठीक बाद अंतरराष्ट्रीय बाजार में चांदी के दाम अचानक तेजी से बढ़ गए। डालमिया ने सही समय पर बड़ी मात्रा में चांदी बुक कर रखी थी, जिससे उन्हें अप्रत्याशित रूप से भारी मुनाफा (करीब ₹1,50,000) हुआ। इस प्रॉफिट ने उनका सारा कर्ज उतार दिया और वे कोलकाता के बड़े व्यापारियों में शुमार हो गए।
बन गए तीसरे सबसे बड़े कारोबारी
इसके बाद ही डालमिया अपने भाई के साथ मिलकर बिहार के डेहरी-ऑन-सोन में 3,800 एकड़ में फैले एक पूरे औद्योगिक शहर डालमियानगर को बसाया। वहां उन्होंने रोहतास इंडस्ट्रीज के तहत सीमेंट फैक्ट्री, पेपर मिल, केमिकल प्लांट और वनस्पति घीजैसी कई फैक्ट्रियां खोलीं।
धीरे-धीरे उन्होंने बैंक, बीमा, विमानन और मीडिया सेक्टर में पैर पसारे और वे आजादी के समय टाटा और बिड़ला के बाद देश के तीसरे सबसे बड़े बिजनेस घराने के मालिक बन गए।
जब जेल गए आरके डालमिया
सन 1955 में एक धोखाधड़ी में डालमिया का नाम आया और 1962 में उन्हें जेल जाना पड़ा। डालमिया कानूनी पचड़ों में फंसे और उन पर भारी कर्ज व टैक्स देनदारियां आ गईं। तब उनके हाथ से उनकी कई संपत्तियां निकल गईं। इसके बाद वे कभी अपना वो रुतबा हासिल नहीं कर पाए। 1978 में रामकृष्ण डालमिया का निधन हो गया।
डालमिया के निधन के बाद डालमियानगर भी वीरान होता चला गया।
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