मुंबई, पीटीआइ। रेटिंग एजेंसी क्रिसिल ने गुरुवार को कहा कि वित्त वर्ष 2020-21 में भारत की इकोनॉमी में नौ फीसद तक का संकुचन देखने को मिल सकता है। एजेंसी ने कहा कि इसके पीछे की वजह यह है कि देश में कोरोनावायरस संक्रमण अब तक अपने चरम पर नहीं पहुंचा है और सरकार सीधे तौर पर पर पर्याप्त राजकोषीय समर्थन नहीं उपलब्ध करा रही है। क्रिसिल ने मई में अर्थव्यवस्था में पांच फीसद के संकुचन का अनुमान जाहिर किया था। क्रिसिल ने कहा है कि अगर GDP में नौ फीसद का संकुचन दर्ज किया जाता है तो यह इकोनॉमी में 1950 से लेकर अब तक का सबसे बड़ा सिकुड़न होगा।  

सरकार ने 20 लाख करोड़ रुपये से अधिक के राहत पैकेज की घोषणा की थी लेकिन वास्तव में नया खर्च जीडीपी के दो फीसद से भी कम रहा था। 

एजेंसी ने कहा, ''अब तक महामारी का चरम स्तर देखने को नहीं मिला है और सरकार सीधे तौर पर पर्याप्त राजकोषीय समर्थन नहीं दे रही है। इससे हमारे पूर्व के अनुमान की तुलना में और गिरावट का जोखिम और मजबूत हो गया है।''

क्रिसिल ने कहा है कि अपनी राजकोषीय स्थिति की वजह से सरकार इकोनॉमी को समर्थन देने के लिए अधिक खर्च नहीं कर पा रही है। अब तक आर्थिक वृद्धि को लेकर उठाए गए नीतिगत उपायों का असर कुछ सेक्टर्स को छोड़कर बहुत अधिक देखने को नहीं मिला है। मई में हमने जीडीपी के एक फीसद के बराबर की अतिरिक्त सीधी मदद का अनुमान लगाया था, जो अब तक देखने को नहीं मिला है। 

एजेंसी का कहना है कि अगर कोरोना महामारी सितंबर-अक्टूबर में अपने पीक पर पहुंचता है तो इस वित्त वर्ष के आखिर तक जीडीपी वृद्धि दर सकारात्मक अंकों में प्रवेश कर सकती है।  

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