नई दिल्ली, बिजनेस डेस्क। दूसरी तिमाही में अर्थव्यवस्था के रफ्तार घटने के आंकड़ों के बाद रेटिंग एजेंसी क्रिसिल ने चालू वित्त वर्ष के लिए भारत की आर्थिक विकास दर के अपने अनुमान में भारी कटौती कर दी है। क्रिसिल ने कहा है कि वर्ष 2019-20 में भारतीय अर्थव्यवस्था की विकास दर 5.1 फीसद रहेगी। पहले इसने 6.3 फीसद वृद्धि दर का अनुमान लगाया था। पहले छह महीने की आर्थिक विकास दर 4.8 फीसद के मुकाबले बाद के छह महीने (अक्टूब-मार्च) की विकास दर में थोड़ा सुधार की गुंजाइश है और यह 5.5 फीसद होगी।

इसके साथ ही क्रिसिल ने यह भी कहा है कि इस हफ्ते मौद्रिक नीति की समीक्षा के दौरान आरबीआइ की तरफ से रेपो रेट में एक बार फिर 25 आधार अंकों (0.25 फीसद) की कटौती संभव है। जबकि एक अन्य निवेश सलाहकार एजेंसी मोतीलाल ओसवाल ने सोमवार को जारी रिपोर्ट में कहा है कि चालू तिमाही यानी अक्टूबर से दिसंबर, 2019 के दौरान विकास दर और घट जाएगी।

इकोस्कोप के नाम से जारी रिपोर्ट में इस एजेंसी ने विकास दर के घट कर 4 फीसद के स्तर पर आ जाने की बात कही है। इस निराशाजनक अनुमान के पीछे इसने सबसे बड़ी वजह यह बताई है कि उपभोक्ताओं की तरफ से होने वाले खर्चे में सुधार के संकेत नहीं मिल रहे हैं। उपभोक्ताओं में निराशा की वजह से ही इस साल का त्योहारी सीजन पिछले कई वर्षो के सबसे खराब रहा है और कई उपभोक्ता उत्पादों की मांग त्योहारों के बावजूद नहीं बढ़ी है। इस आधार पर इसने चालू वित्त वर्ष के लिए विकास दर अनुमान को 5.7 फीसद से घटा कर 4 फीसद कर दिया।

क्रिसिल की बेहद विस्तृत रिपोर्ट में कहा गया है कि हाल के वर्षो में कई बड़े सुधारों के बावजूद भारत की विकास दर में इतनी तेज गिरावट असलियत में बड़ी चिंता की बात है। मंदी का स्तर अनुमान से ज्यादा है। तेजी से गिरावट का यह दौर आगे भी जारी रह सकता है। अर्थव्यवस्था में सुधार के लक्षण दिखाई देने में अभी समय लग सकता है।

Posted By: Pawan Jayaswal

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