नई दिल्ली (बिजनेस डेस्क/एजेंसी)। कच्चे तेल, रिफाइनरी उत्पाद और बिजली उत्पादन में आई गिरावट की वजह से जनवरी महीने में कोर सेक्टर का ग्रोथ रेट कम होकर 1.8 फीसद हो गया।

जनवरी 2018 में कोर सेक्टर की वृद्धि दर 6.2 फीसद रही थी। कोर सेक्टर में कोयला, कच्चा तेल, प्राकृतिक गैस, रिफाइनरी प्रॉडक्ट्स, फर्टिलाइजर्स, स्टील, सीमेंट और बिजली शामिल हैं। जनवरी महीने में कच्चा तेल, रिफाइनरी प्रॉडक्ट्स और बिजली की ग्रोथ रेट क्रमश: 4.3, 2.6 और 0.4 फीसद रही।

वहीं कोयला और सीमेंट सेक्टर 1.7 और 11 फीसद की गति से आगे बढ़ा। जनवरी 2018 में इसकी रफ्तार क्रमश: 3.8 और 19.6 फीसद थी। हालांकि, प्राकृतिक गैस, फर्टिलाइजर्स और स्टील उत्पादन क्रमश: 6.2, 10.5 और 8.2 फीसद की दर से बढ़ा।

कोर सेक्टर ग्रोथ रेट में आई सुस्ती का असर औद्योगिक उत्पादन सूचकांक पर भी होता है, जिसमें इन आठ अहम क्षेत्र की भागीदारी करीब 41 फीसद होती है।

कॉमर्स एंड इंडस्ट्री मिनिस्ट्री के आंकड़ों के मुताबिक 2018-19 में अप्रैल से जनवरी के बीच कोर सेक्टर का ग्रोथ रेट पिछले वित्त वर्ष की समान अवधि के 4.1 फीसद के मुकाबले 4.5 फीसद रहा।

दिसंबर तिमाही में GDP कम होकर 6.6 फीसद

चालू वित्त वर्ष की तीसरी तिमाही में भारतीय अर्थव्यवस्था को भारी झटका लगा है। दिसंबर तिमाही में आर्थिक वृद्ध दर अनुमान से भी कम रही है। सरकार की तरफ से जारी आंकड़ों के मुताबिक दिसंबर तिमाही में जीडीपी (सकल घरेलू उत्पाद) कम होकर 6.6 फीसद हो गई, जो पांच तिमाही का न्यूनतम स्तर है।

पिछले साल की समान तिमाही में आर्थिक वृद्धि दर 7 फीसद रही थी। रॉयटर्स के पोल में अर्थशास्त्रियों ने इसके 6.9 फीसद रहने का अनुमान लगाया था।

गौरतलब है कि 2018-19 की दूसरी तिमाही में जीडीपी की रफ्तार गिरकर 7.1 रही थी, जबकि इसकी पिछली तिमाही में यह 8.2 फीसदी थी।

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Posted By: Abhishek Parashar

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