₹3300 करोड़ से Coal India ने बनाया 8 नई वॉशरीज का खाका, Tata Steel से मिलकर पलटेगी विदेशियों का पूरा गेम
कोल इंडिया ₹3300 करोड़ के निवेश से 8 नई कोकिंग कोल वॉशरीज स्थापित करेगी। वित्तीय वर्ष 2030 तक चालू होने ...और पढ़ें

कोल इंडिया 8 नई कोकिंग कोल वॉशरीज लगभग 3,300 करोड़ रुपये में बनाएगी।
HighLights
कोल इंडिया ₹3300 करोड़ से 8 नई वॉशरीज स्थापित करेगी।
घरेलू कोयले की गुणवत्ता सुधरेगी, आयात पर निर्भरता कम होगी।
टाटा स्टील संग साझेदारी, स्टील सेक्टर को मिलेगा फायदा।
नई दिल्ली। सार्वजनिक क्षेत्र की खनन कंपनी कोल इंडिया (Coal India) ने कोयले की गुणवत्ता में सुधार लाने और आयात पर निर्भरता कम करने के लिए एक बड़ा कदम उठाया है। शुक्रवार को कंपनी ने बताया कि वह 8 नई कोकिंग कोल वॉशरीज (Coking Coal Washeries) स्थापित करने के लिए लगभग 3,300 करोड़ रुपये का निवेश करेगी।
कोल इंडिया की इन नई वॉशरीज की कुल क्षमता 21.5 मिलियन टन प्रति वर्ष (MTY) होगी। उम्मीद है कि वित्तीय वर्ष 2030 (FY30) तक ये पूरी तरह से काम करना शुरू कर देंगी। वर्तमान में कंपनी के पास 10 वॉशरीज का नेटवर्क है, जिनकी कुल क्षमता 18.35 MTY है। इसके अलावा, कंपनी अपनी मौजूदा कोकिंग कोल वॉशरीज की क्षमता और उपयोग को बेहतर बनाने के लिए उनके नवीनीकरण और आधुनिकीकरण पर भी लगभग 300 करोड़ रुपये का अतिरिक्त निवेश करेगी।
कहां लगेंगी ये नई वॉशरीज?
योजना के मुताबिक, इन 8 नई सुविधाओं में से 5 वॉशरीज सेंट्रल कोलफील्ड्स लिमिटेड (CCL) के तहत स्थापित की जाएंगी, जिनकी कुल क्षमता 14.5 MTY होगी। वहीं, बाकी 3 वॉशरीज भारत कोकिंग कोल लिमिटेड (BCCL) के तहत बनेंगी, जिनकी क्षमता 7 MTY होगी। ये मुख्य रूप से झारखंड राज्य और पश्चिम बंगाल के रानीगंज शहर के आसपास बनाई जाएंगी।
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टाटा स्टील के साथ कौन-सी हुई साझेदारी?
घरेलू स्टील सेक्टर को उच्च गुणवत्ता वाले कोकिंग कोल की आपूर्ति बढ़ाने के लिए कोल इंडिया ने पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप (PPP) मॉडल के तहत टाटा स्टील (Tata Steel) के साथ हाथ मिलाया है। इस सहयोग का उद्देश्य वॉशिंग क्षमता और तकनीकी विशेषज्ञता का अधिकतम लाभ उठाना है। इसके साथ ही, थ्रूपुट और रिकवरी एफिशिएंसी में सुधार के लिए दो पुरानी वॉशरीज का भी आधुनिकीकरण किया जा रहा है।
पुरानी संपत्तियों का मुद्रीकरण
राष्ट्रीय मुद्रीकरण पाइपलाइन (National Monetisation Pipeline) के तहत कोल इंडिया अपनी पुरानी संपत्तियों से भी पैसा जुटाने की कोशिश कर रही है। भारत कोकिंग कोल (BCCL) में एक कोकिंग कोल वॉशरी का मुद्रीकरण करने के बाद, कंपनी की योजना अब तीन और गैर-परिचालन इकाइयों के मुद्रीकरण की है।
स्टील प्रोडक्शन को कैसे मिलेगा फायदा?
कोकिंग कोल स्टील बनाने के लिए एक प्रमुख कच्चा माल है। भारत में कोकिंग कोल का भंडार सीमित है और इसमें राख (Ash) की मात्रा बहुत अधिक (25% से 45% के बीच) होती है। इसी वजह से भारत को भारी मात्रा में कोकिंग कोल का आयात करना पड़ता है। इन नई वॉशरीज के शुरू होने से घरेलू कोयले की गुणवत्ता में सुधार होगा और आयातित कोकिंग कोल पर भारत की निर्भरता कम होगी। कंपनी का मानना है कि इन पहलों से विदेशी मुद्रा की बचत होगी और देश की औद्योगिक प्रतिस्पर्धा को बढ़ावा मिलेगा।
कोल इंडिया शेयरों में कितनी दिखी तेजी
इस खबर के बीच, शुक्रवार को दोपहर में कोल इंडिया के शेयरों में तेजी देखने को मिली और यह 0.4% की बढ़त के साथ 445.45 रुपये के स्तर पर कारोबार कर रहा था।
