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नई दिल्ली (बिजनेस डेस्क)। अमेरिका के साथ चल रहे व्यापार युद्ध और आर्थिक मंदी का असर दुनिया की दूसरी बड़ी अर्थव्यवस्था पर दिखने लगा है। चीन ने इस साल के लिए जीडीपी (सकल घरेलू उत्पाद) के अनुमान को आधिकारिक रूप से घटाकर 6-6.5 फीसद कर दिया है।

चीन की अर्थव्यवस्था पर न केवल अमेरिका के साथ जारी व्यापार युद्ध का असर हुआ है, बल्कि उसे आर्थिक मंदी का भी सामना करना पड़ रहा है। चीन की अर्थव्यवस्था निर्यात पर आधारित है और पिछले साल यह 6.6 फीसद की दर से आगे बढ़ी थी, जो पिछले तीन दशक में सबसे कमजोर ग्रोथ रेट थी।

माना जा रहा है कि अर्थव्यवस्था को दुरुस्त करने के लिए चीन विदेशी निवेश से जुड़े नए नियम को मंजूरी दे सकता है। इससे जुड़े मसौदा को नैशनल पीपुल्स कांग्रेस (एनपीसी) में पेश किया जाएगा, जिसकी बैठक 8 मार्च से शुरू हो रही है।

पिछले साल चीन और अमेरिका के बीच व्यापार युद्ध की शुरुआत हुई थी। अमेरिका के साथ चीन का व्यापार घाटा 375 अरब डॉलर रहा है, जिसे ट्रंप घटाने की मांग करते रहे हैं। 250 अरब डॉलर के चीनी निर्यात पर अमेरिका पहले ही शुल्क बढ़ा चुका है। इसके साथ ही अमेरिका ने 200 अरब डॉलर के अन्य निर्यात पर भी शुल्क बढ़ाने की चेतावनी दी है।

सबसे मजबूत इकॉनमी बना रहेगा भारत: हाल ही में भारत सरकार ने भी चालू वित्त वर्ष के लिए जीडीपी पूर्वानुमान में कटौती की है।

केंद्रीय सांख्यिकी कार्यालय (सीएसओ) ने 2018-19 के लिए जीडीपी के पूर्वानुमान को 7.2 फीसद से घटाकर 7 फीसद कर दिया है।

हालांकि, इसके बावजूद भारतीय अर्थव्यवस्था चीन को पीछे छोड़ते हुए दुनिया की सबसे तेज गति से बढ़ने वाली अर्थव्यवस्था बना रहेगा।

दिसंबर तिमाही में भारतीय जीडीपी 6.4 फीसद रही, जिसके बाद सरकार ने पूरे साल के लिए जारी पूर्वानुमान को संशोधित कर दिया। इसी तिमाही में चीनी अर्थव्यवस्था की वृद्धि दर 6.4 फीसद रही थी।

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Posted By: Abhishek Parashar

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