नई दिल्ली, जागरण ब्यूरो। देश में इलेक्ट्रिक कारों के प्रचलन को बढ़ाने की राह में सबसे बड़ी बाधा पर्याप्त चार्जिंग स्टेशन की सुविधा का नहीं होना है। केंद्र सरकार ने इस समस्या के समाधान के लिए चरणबद्ध तरीके से आगे बढ़ने की नीति शुक्रवार को लागू की। इसके तहत अगले पांच वर्षों के भीतर राज्यों की सभी राजधानी, बड़े शहरों, शहरों को जोड़ने वाले प्रमुख राजमार्गों और राष्ट्रीय राजमार्गों पर पर्याप्त चार्जिग स्टेशन लगाए जाएंगे।

यह है मकसद

उद्देश्य यह है कि शहरों में हर तीन वर्ग किलोमीटर के क्षेत्र में एक चार्जिंग स्टेशन हो जबकि राष्ट्रीय राजमार्ग पर हर 25 किलोमीटर पर इसकी सुविधा हो। जबकि 100 किलोमीटर के एरिया में कम से कम एक फास्ट चार्जिग सुविधा होगी।

जमीन की दिक्कतों का रखा ख्‍याल

अक्टूबर 2019 को जारी इसी तरह के एक और नीति में संशोधन किया गया है। इसमें इस बात का भी ख्याल रखा गया है कि चार्जिग स्टेशन लगाने में आने वाली जमीन की दिक्कतों को दूर किया जा सके और चार्जिग शुल्क को कम रखा जाए ताकि आम जनता तेजी से बिजली से चलने वाले वाहनों की खरीद कर सके। नीति में सरकारी जमीन पर चार्जिग स्टेशन लगाने का रास्ता भी खोल दिया गया है।

हर किसी को चार्जिग स्टेशन लगाने की छूट

साथ ही हर किसी को सार्वजनिक चार्जिग स्टेशन लगाने की अनुमति प्रदान कर दी गई है और वह भी बगैर किसी लाइसेंस के। हां, इसके लिए उन्हें तकनीकी, सुरक्षा व सरकार की तरफ से तय दूसरे मानकों का पालन करना होगा। इस बारे में बिजली मंत्रालय, सड़क और राजमार्ग मंत्रालय सहित दूसरे संबंधित विभागों की तरफ से नियम जारी होंगे। इस तरह की सुविधा लगानी होगी कि हर तरह के वाहनों की चार्जिंग हो सके।

रेवेन्यू शेयरिंग माडल का भी प्रस्ताव

नए नियमों के तहत इस बात की भी व्यवस्था की गई है कि चार्जिग स्टेशन लगाने वालों को काफी कम कीमत पर जमीन मुहैया हो। इसके लिए रेवेन्यू शेय¨रग माडल का भी प्रस्ताव है यानी जिसकी जमीन पर चार्जिग स्टेशन लगाया जा रहा है और जो चार्जिंग स्टेशन लगा रहा है या जो कंपनियां इस बारे में आवश्यक सुविधा दे रही हैं उनके बीच राजस्व वितरण हो सके।

जमीन मुहैया कराने वाले को हर तीन महीने पर भुगतान

जमीन मुहैया कराने वाली एजेंसी को एक रुपये प्रति किलोवाट की दर से चार्जिंग शुल्क का भुगतान होगा। भुगतान हर तीन महीने पर होगा। इस बारे में सभी संबंधित पक्षों के बीच 10 वर्षो का समझौता हो सकता है। इसके साथ ही केंद्र ने राज्यों की एजेंसियों को निर्देश दिया है कि मेट्रो शहरों में चार्जिग स्टेशन लगाने के लिए आवेदन आने के सात दिनों के भीतर बिजली कनेक्शन उपलब्ध कराई जानी। नगर निगमों में 15 दिनों के भीतर और ग्रामीण इलाकों में एक महीने के भीतर बिजली कनेक्शन देने का निर्देश दिया गया है।

एक तरह का शुल्क वसूल सकेंगी बिजली कंपनियां

ग्राहकों से वसूले जाने वाले शुल्क के बारे में कहा गया है कि बिजली कंपनियां चार्जिंग स्टेशनों से एक ही शुल्क वसूलेंगी। यह शुल्क 31 मार्च, 2025 तक बिजली आपूर्ति का औसत शुल्क होगा। यानी सिर्फ लागत वसूली जाएगी। ग्राहकों से वसूले जाने वाले शुल्क के बारे में कहा गया है कि इसका निर्धारण राज्य सरकारें करेंगी। राज्य एक तरह से अधिकतम शुल्क तय करेंगी।

कनेक्‍शन देने से कोई नहीं कर सकता इनकार

चार्जिंग स्टेशन अपनी मर्जी से जिस भी वितरण कंपनी से चाहें उससे कनेक्शन ले सकते हैं। उन्हें कनेक्शन देने से कोई इन्कार नहीं करेगा। एक से तीन वर्ष के भीतर सभी महानगरों में और तीन से पांच वर्ष के भीतर सभी राजधानी और बड़े शहरों में तीन वर्ग किमी के क्षेत्रफल में चार्जिग स्टेशन लगाए जाएंगे। 

Edited By: Krishna Bihari Singh