नई दिल्ली (बिजनेस डेस्क)। केंद्र सरकार कांट्रैक्ट फार्मिंग यानी अनुबंधित खेती के लिए कानून का मसौदा अगले कुछ हफ्तों में तैयार कर लेगी। वित्त मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार मसौदे पर विभिन्न पक्षों से मिले सुझावों को शामिल करके अंतिम रूप दिया जा रहा है।

सरकार ने मॉडल क्रांट्रैक्ट फार्मिग एक्ट का मसौदा जारी करके सभी पक्षों से सुझाव व टिप्पणी आमंत्रित की गई थीं। नेशनल रेनफेड एरिया अथॉरिटी (एनआरएए) के सीईओ अशोक दलवई ने एक कार्यक्रम ने कहा कि मसौदे पर मिले सुझावों पर विचार करके शामिल किया जा चुका है। हम अगले कुछ हफ्तों में इसे अंतिम रूप दे देंगे।

उन्होंने कहा कि अनुबंधित खेती ऐसा तरीका है जिससे कृषि व बागवानी क्षेत्र में बर्बादी रोकी जा सकती है और किसानों को फायदा दिलाया जा सकता है। इस समय कृषि उपज की काफी बर्बादी होती है। मॉडल कानून तैयार हो जाएगा तो उसे राज्यों के पास लागू करने के लिए भेजा जाएगा।

कार्यक्रम में सेंटर फॉर कोल्ड चेन डवलपमेंट (एनसीसीडी) के सीईओ व चीफ एडवाइजर पवनेश कोहली ने कहा कि सरकार पारंपरिक बाजारों के एग्री प्रोड्यूस मार्केटिंग कमेटी (एपीएमसी) कानून को नए कानून से बदलने पर गंभीरता से विचार कर रही है। नए कानून के फायदे एक साल में दिखाई देने लगेंगे। हालांकि खेती राज्यों के अधिकार क्षेत्र में आती है।

कृषि निर्यात को प्रोत्साहन के लिए व्यापक नीति बनेगी

वाणिज्य मंत्रालय कृषि उत्पाद जैसे चाय, फल व सब्जियों के निर्यात को बढ़ावा देने के लिए परिवहन समेत सभी मसलों पर व्यापक नीति बनाने की तैयारी कर रहा है। भारत कृषि उत्पादों का सबसे बड़ा उत्पादक और निर्यातक है। इस क्षेत्र में अभी भी निर्यात बढ़ाने की व्यापक संभावनाए हैं। मंत्रालय के अधिकारी के अनुसार ग्लोबल वैल्यू चेन में शामिल करके इन उत्पादों में वैल्यू एडीशन की काफी गुंजाइश है। सरकार की व्यापक नीति में लॉजिस्टिक और सर्टिफिकेशन समेत सभी मुद्दों को शामिल किया जाएगा। निर्यात बढ़ाने के लिए बेहतरीन इन्फ्रास्ट्रक्चर होना अत्यंत महत्वपूर्ण है। इससे किसानों की आय दोगुनी करने और निर्यात बढ़ाने में मदद मिलेगी। 

Posted By: Shubham Shankdhar