जागरण ब्यूरो, नई दिल्ली। सार्वजनिक उपक्रमों की विनिवेश प्रक्रिया की रफ्तार को अब उनके प्रशासनिक मंत्रालय धीमा नहीं कर पाएंगे। सरकार ने विनिवेश की प्रक्रिया में सरकारी कंपनियों के संबंधित मंत्रालयों की भूमिका को सीमित करने का फैसला लिया है। इस क्रम में वित्त मंत्रालय के डिपार्टमेंट ऑफ इनवेस्टमेंट एंड पब्लिक असेट मैनेजमेंट (दीपम) को सार्वजनिक उपक्रमों में रणनीतिक विनिवेश की पूरी जिम्मेदारी सौंप दी है।

इस बदलाव के बाद अब दीपम सचिव विनिवेश पर अंतर मंत्रालयी समिति की बैठकों में संबंधित मंत्रालय के सचिव के साथ सह-अध्यक्ष होंगे। इतना ही नहीं रणनीतिक विनिवेश के लिए सार्वजनिक उपक्रमों की पहचान का काम भी नीति आयोग को दीपम के साथ मिलकर करना होगा। अभी तक नीति आयोग के पास ही रणनीतिक विनिवेश के लिए सार्वजनिक उपक्रमों की पहचान कर उनकी सूची तैयार करने की जिम्मेदारी थी।

सूत्र बताते हैं कि इस प्रस्ताव पर केंद्रीय मंत्रिमंडल ने भी अपनी सहमति प्रदान कर दी है। जल्दी ही इसकी औपचारिक घोषणा होने की उम्मीद है। वित्त मंत्रालय के एक अधिकारी के मुताबिक आमतौर पर अभी तक रणनीतिक निवेश के लिए सार्वजनिक उपक्रमों की पहचान का काम नीति आयोग करता है। इसके बाद किसी उपक्रम में रणनीतिक विनिवेश की प्रक्रिया तय करने का काम अंतर मंत्रालयी समिति करती है जिसकी अध्यक्षता अभी तक उपक्रम विशेष से जुड़े संबंधित मंत्रालय का सचिव करता है। लेकिन अब तक के अनुभव के आधार पर यह देखा गया कि सामान्य तौर पर प्रशासनिक मंत्रालयों का रुख अपने अधीन आने वाले पीएसयू के रणनीतिक विनिवेश की प्रक्रिया को लंबा खींचने पर अधिक रहता है। इससे विनिवेश की प्रक्रिया लंबे समय तक टलती रहती है। इससे सरकार को विनिवेश के अपेक्षित नतीजे प्राप्त करने में परेशानी हो रही थी।

गौरतलब है कि पिछले सप्ताह ही सचिवों के समूह ने बीपीसीएल, शिपिंग कॉरपोरेशन, कॉनकोर, नीपको और टीएचडीसी में सरकार की हिस्सेदारी की बिक्री को मंजूरी देने का फैसला किया। आमतौर पर रणनीतिक बिक्री में दो स्तर की निविदा प्रक्रिया अपनायी जाती है। पहली में एक्सप्रेशन ऑफ इंट्रेस्ट या निविदा भरने की इच्छा का आवेदन होता है और इसके बाद वित्तीय निविदा होती है जिसमें हिस्सेदारी की बोली लगायी जाती है। इससे पूर्व निवेशक समूहों के साथ बैठकों और रोड शो के जरिए निवेशकों को आकर्षित करने का प्रयास किया जाता है।

लेकिन इस प्रक्रिया तक पहुंचने में प्रशासनिक मंत्रालय किसी न किसी वजह से प्रक्रिया को लंबा खींच देते हैं। जबकि सरकार चाहती है कि रणनीतिक विनिवेश की प्रक्रिया एक निश्चित समयावधि में पूरी हो जाए। अधिकारियों का मानना है कि इसके लिए चार से पांच महीने का समय निश्चित किया गया है। इसी समयावधि में किसी भी पीएसयू में रणनीतिक विनिवेश की प्रक्रिया पूरी करने के लिए ही सरकार ने यह बदलाव करने का निर्णय किया है ताकि इस प्रक्रिया को बेवजह लंबा न खींचा जा सके।

Posted By: Nitesh

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