नई दिल्ली (पीटीआई)। बदलती तकनीक के चलते भारत का जॉब लैंडस्केप परिवर्तन के दौर से गुजर रहा है। इसी के कारण साल 2022 तक करीब 9 फीसद लोग यानी कि करीब 600 मिलियन वर्कफोर्स ऐसे नए रोजगार से जुड़ा होगा जो कि आज अस्तित्व में भी नहीं है। यह जानकारी एक रिपोर्ट के जरिए सामने आई है।

फिक्की-नैस्कॉम एवं ईवाई की एक रिपोर्ट के मुताबिक अगले दो वर्षों के दौरान जॉब सेक्टर में स्लोडाउन देखने को मिलेगा। इस वक्त कंपनियां अपने बिजनेस मॉडल को पुर्नगठित करने के लिए संघर्ष कर रही हैं। ऐसे में वर्ष 2022 तक देश के जॉब लैंडस्कैप में एक बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है।

यह रिपोर्ट जो कि रोजगार परिदृश्य पर वैश्वीकरण, जनसांख्यिकी और घातीय तकनीकी प्रभावों को उजागर करती है, बताती है कि साल 2022 तक 9 फीसद लोगों को ऐसा नया रोजगार मिल जाएगा, जो कि वर्तमान समय में मौजूद नहीं है, जबकि 37 फीसद लोग ऐसे रोजगार में होंगे जो कि कौशल के स्तर में बदलाव कर देंगे। इतना ही नहीं साल 2017 में 21 फीसद लोगों की नौकरियों पर खतरा मंडरा सकता है।

पीपुल एंड ऑर्गेनाइजेशन एडवाइजरी सर्विसेज, ईवाई के पार्टनर अनुराग मलिक ने बताया नई तकनीकों का इस्तेमाल नए बाजार का निर्माण कर उद्योग जगत में बाधा उत्पन्न कर रहा है और भारत इस परिवर्तन के शिखर पर है।

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