नई दिल्ली, पीटीआइ। प्रॉपर्टी ब्रोकरेज फर्म एनारॉक ने शुक्रवार को कहा कि सात बड़े शहरों में बिल्डर्स करीब 66,000 करोड़ की तैयार हाउसिंग यूनिट्स लेकर बैठे हुए हैं। एनारॉक ने इन बिल्डर्स से कहा है कि कोरोना वायरस महामारी के बीच अपने तैयार स्टॉक को बेचने के लिए वे ग्राहकों से डिस्काउंट की पेशकश करें। एनारॉक के अनुसार, देश के सात बड़े शहरों, दिल्ली-एनसीआर, मुंबई महानगरीय क्षेत्र, चेन्नई, कोलकाता, बेंगलुरु, हैदराबाद और पुणे में मार्च तिमाही के अंत तक 78,000 बिना बिके हुए तैयार फ्लैट्स थे। इन यूनिट्स की कीमत 65,950 करोड़ रुपये है।

एनारॉक के अध्यक्ष अनुज पुरी ने कहा, 'डेवलपर्स को उनकी होल्डिंग कैपेसिटी और वित्तीय संकट के आधार पर अनसोल्ड इनवेंट्री के बारे में सोचकर निर्णय लेने की जरूरत है।' उन्होंने कहा, 'मजबूत बैलेंस शीट वाले संगठित डेवलपर्स छूट की पेशकश करने के लिए कम उपयुक्त हैं, लेकिन जिन डेवलपर्स को तत्काल लिक्विडिटी की जरूरत है, उन्हें इन विकल्पों पर विचार करने की आवश्यकता है। इन विकल्पों में कीमत में रियायत और इन्सेंटिव जैसे विकल्प शामिल हैं।'

बिना बिके हुए रेडी-टू-मूव-इन यानी रहने के लिए तैयार यूनिट्स 6.44 लाख यूनिट्स के कुल अनसोल्ड स्टॉक में 12 फीसद हिस्सा रखते हैं। शेष 88 फीसद निर्माणाधीन हैं। पुरी ने नए घर खरीदारों को भी सलाह दी कि वे बिल्डरों के साथ कड़ा मोल-भाव करें और रेडी-टू-मूव-इन अपार्टमेंट्स का अच्छा सौदा करें। उन्होंने कहा कि होम लोन्स पर ब्याज दर इस समय घटकर 7.15 से 7.80 के बीच आ गई है।

पुरी ने कहा कि लॉकडाउन के दौरान भारतीय रियल एस्टेट सेक्टर में तेजी से तकनीकी से जुड़े बदलाव हुए हैं। आंकड़ों के अनुसार, कोरोना वायरस से सबसे ज्यादा प्रभावित एमएमआर में 26,150 करोड़ रुपये का 19,200 बिना बिके हुए तैयार घरों का अधिकतम स्टॉक है। 

Posted By: Pawan Jayaswal

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