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Budget 2026: फियो ने की इनवर्टेड ड्यूटी ढांचा खत्म करने और रियायती टैक्स के विस्तार की मांग

Published: Thu, 22 Jan 2026 05:29 PM (IST)

Budget 2026 exporters expectations: फियो ने बजट 2026 के लिए कई महत्वपूर्ण सुझाव दिए हैं। इनमें इनवर्टेड ड्यूटी ढांचे को ...और पढ़ें

बजट 2026 के लिए फियो के सुझाव

बजट 2026 के लिए फियो के सुझाव

HighLights

  1. इनवर्टेड ड्यूटी ढांचा समाप्त करने की तत्काल मांग।

  2. नई मैन्युफैक्चरिंग इकाइयों को रियायती कर का विस्तार।

  3. R&D और निर्यात मार्केटिंग पर कर कटौती।

FIEO Budget 2026 suggestions: निर्यातकों के संगठन फियो ने 1 फरवरी को पेश किए जाने वाले आम बजट (Budget 2026) के लिए कुछ सुझाव दिए हैं। इसमें घरेलू मैन्युफैक्चरिंग बढ़ाने के लिए इनवर्टेड ड्यूटी ढांचा खत्म करना, नई इकाइयों के लिए रियायती टैक्स दर सुविधा का विस्तार, रिसर्च एवं डेवलपमेंट के लिए टैक्स डिडक्शन और घरेलू शिपिंग लाइन विकसित करना शामिल हैं।

इनवर्टेड ड्यूटी की समस्या

फियो प्रेसिडेंट एस.सी. रल्हन ने कहा है कि बजट में इनवर्टेड ड्यूटी की समस्या का तत्काल समाधान (inverted duty structure reform) करना चाहिए। इसमें कच्चे माल, कंपोनेंट और मध्यवर्ती वस्तुओं पर आयात शुल्क तैयार माल की तुलना में अधिक होता है। उन्होंने निर्यात करने वाले उद्योगों में उपयोग किए जाने वाले प्रमुख इनपुट पर आयात शुल्क घटाने की सिफारिश की है ताकि इनपुट लागत तैयार उत्पाद पर शुल्क के अनुरूप हो।

रल्हन के अनुसार इनवर्टेड ड्यूटी स्ट्रक्चर भारतीय निर्यातकों की लागत प्रतिस्पर्धात्मकता को काफी कम करता है। इनपुट टैक्स क्रेडिट जमा हो जाने से वर्किंग कैपिटल फंस जाती है। उदाहरण के लिए, सिंथेटिक यार्न और फाइबर पर तैयार कपड़े और वस्त्रों की तुलना में अधिक सीमा शुल्क लगता है। इसी तरह इलेक्ट्रॉनिक कंपोनेंट जैसे पीसीबी, कनेक्टर और सब-असेंबली पर इलेक्ट्रॉनिक उत्पादों की तुलना में अधिक आयात शुल्क लगता है। यही स्थिति रसायन, प्लास्टिक, चमड़ा, जूते-चप्पल की है।

घरेलू शिपिंग लाइन डेवलप हो

फियो का कहना है कि बजट में भारत में वैश्विक-पैमाने की शिपिंग लाइन तैयार करने के लिए राजकोषीय सहायता प्रदान की जानी चाहिए। इसमें दीर्घकालिक फाइनेंस, वायबिलिटी गैप फंडिंग और रेगुलेटरी उपाय शामिल हैं।

फियो का कहना है कि विदेशी शिपिंग लाइनों पर भारत की अत्यधिक निर्भरता से निर्यातकों की माल ढुलाई लागत बढ़ती है। इसके अलावा आपूर्ति में रुकावट और वैश्विक शिपिंग दरों में अस्थिरता का नुकसान होता है। भारतीय शिपिंग लाइन के विकास से माल ढुलाई लागत काफी कम हो सकती है। अनुमान है कि एक मजबूत घरेलू शिपिंग पारिस्थितिकी तंत्र के माध्यम से भारत सालाना 40-50 अरब डॉलर माल बचा सकता है। यह सीधे निर्यात प्रतिस्पर्धात्मकता को बढ़ाएगा।

राजकोषीय और कर प्रोत्साहन

फियो ने आयकर अधिनियम की धारा 35(2AB) के तहत इन-हाउस अनुसंधान और विकास (R&D) खर्च के लिए 200-250% वेटेड टैक्स डिडक्शन को बहाल करने और एलएलपी (LLP), साझेदारी फर्मों तथा प्रोप्राइटरशिप, विशेष रूप से एमएसएमई (MSME) को शामिल करने की सिफारिश की है।

फियो का कहना है कि ऐतिहासिक रूप से, 200% वेटेड डिडक्शन ने R&D और नवाचार में निजी क्षेत्र के निवेश को काफी प्रोत्साहित किया। इसमें कमी ने भारत के नवाचार पारिस्थितिकी तंत्र को ऐसे समय में कमजोर कर दिया है जब वैश्विक प्रतिस्पर्धा तेज हो रही है। वर्तमान में 38 ओईसीडी (OECD) देशों में से 35 R&D के लिए कर प्रोत्साहन देते हैं। एमएसएमई भारत के निर्यात इकोसिस्टम की रीढ़ हैं और अक्सर राजकोषीय सहायता के बिना R&D में निवेश करने के लिए वित्तीय क्षमता की कमी होती है।

विदेश में मार्केटिंग के लिए कर कटौती

फियो का कहना है कि बजट में विदेश में मार्केटिंग, ब्रांडिंग, व्यापार मेलों और प्रचार पर किए गए खर्च के लिए 200% कर कटौती प्रदान करनी चाहिए, जिससे विशेष रूप से एमएसएमई निर्यातकों को लाभ हो। प्रतिस्पर्धी निर्यातक देशों की तुलना में वैश्विक बाजारों में भारत के सामान और सेवाओं को कम शोकेस किया जाता है। मार्केटिंग और ब्रांडिंग की ऊंची लागत एमएसएमई निर्यातकों को नए बाजारों को आक्रामक रूप से आगे बढ़ने में बाधक है।

नई इकाइयों के लिए 15% रियायती टैक्स का विस्तार

फियो ने नई घरेलू मैन्युफैक्चरिंग इकाइयों के लिए धारा 115BAB के तहत 15% रियायती कॉर्पोरेट टैक्स (export tax incentives) दर को पिछली कट-ऑफ तारीख 31 मार्च, 2024 से कम से कम पांच साल और आगे बढ़ाने का सुझाव दिया है। इसका कहना है कि ऐसे समय जब भारत मैन्युफैक्चरिंग में निवेश और सप्लाई चेन के लिए वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धा कर रहा है, इस कर व्यवस्था की समाप्ति भारत के आकर्षण को कम करती है। योजना का विस्तार नीतिगत स्थिरता प्रदान करेगा, और सरकार के 'मेक इन इंडिया' उद्देश्यों को सुदृढ़ करेगा।