नई दिल्ली, राजीव कुमार। वित्तीय संकट की चुनौती से जूझ रही सरकार आगामी वित्त वर्ष 2021-22 में हर हाल में टैक्स विवाद से जुड़ी पूरी राशि हासिल करने की कोशिशों में जुटी है। इस कोशिश को सफल बनाने के लिए सरकार आगामी बजट में विवाद से विश्वास योजना को नए स्वरूप में पेश कर सकती है। अगर सरकार को टैक्स विवाद से जुड़े 9.5 लाख करोड़ रुपये मिल जाते हैं तो उसकी वित्तीय समस्या काफी हद सुलझ सकती है। वित्त वर्ष 2018-19 के अंत में टैक्स विवाद से जुड़े 9.5 लाख करोड़ में से 4.05 लाख करोड़ रुपये कॉरपोरेट टैक्स 3.97 लाख करोड़ रुपये इनकम टैक्स व 1.54 लाख करोड़ रुपये जीएसटी से संबंधित हैं।

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विवाद से विश्वास योजना चालू चालू वित्त वर्ष में लागू की गई थी। सरकार ने इस स्कीम की घोषणा टैक्स विवाद से जुड़ी राशि को अपने खाते में लाने की मंशा से की थी, लेकिन बीते नवंबर तक सरकार को करीब 72,500 करोड़ रुपये ही मिल पाए थे।

विवाद से विश्वास स्कीम में करीब 4.82 लाख मामले जुड़े हैं जबकि पिछले साल नवंबर मध्य तक 48,855 मामले से इस स्कीम से जुड़ पाए थे। अब विवाद से विश्वास स्कीम के तहत विवादित राशि जमा करने की अंतिम तारीख इस वर्ष 31 मार्च कर दी गई है।

सूत्रों के मुताबिक इस योजना को उम्मीद के मुताबिक प्रतिक्रिया मिल नहीं पाई है। इसे देखते हुए वित्त मंत्री आगामी बजट में इसे नए रूप में पेश कर सकती हैं।

विशेषज्ञों के मुताबिक चालू वित्त वर्ष में कोरोना महामारी की वजह से केंद्र सरकार के शुद्ध राजस्व में बजट अनुमान के मुकाबले 3.2 लाख करोड़ की कमी का अनुमान है। वहीं केंद्र के खर्च में बजट अनुमान के मुकाबले 3.3 लाख करोड़ की बढ़ोतरी रहेगी।

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