नई दिल्ली (जेएनएन)। बॉम्बे हाईकोर्ट ने रियल एस्टेट (विनियमन और विकास) अधिनियम (आरईआरए) की संवैधानिक वैधता को बरकरार रखा है। कोर्ट का मानना है कि फ्लैट खरीदारों के हितों की रक्षा करना और अधूरी परियोजनाओं को विकसित करना महत्वपूर्ण है।

यह देखते हुए कि आवासीय क्षेत्र में "बड़ी समस्याएं" हैं अदालत ने यह भी कहा कि अब महात्मा गांधी के प्रत्येक आंखों से हर आंसू पोंछने की विचारधारा को पूरा करने के लिए एक कदम आगे जाने का समय है। अदालत ने इस अधिनियम के कार्यान्वयन के मुद्दे पर भी गौर किया और कहा कि इस पर बारीक नजर रखी जानी चाहिए। जस्टिस नरेश पाटिल व जस्टिस राजेश केतकर की पीठ ने रियल एस्टेट डेवलपर्स और कुछ प्लॉट मालिकों की ओर से दायर विभिन्न याचिकाओं पर अपना फैसला सुनाया। इन याचिकाओं में रेरा की संवैधानिक वैधता को चुनौती दी गई थी, जिसे इस साल मई में लागू किया जा चुका है।

हालांकि, न्यायमूर्ति पाटिल की अध्यक्षता वाली पीठ ने अपने फैसले में डेवलपर को थोड़ी छूट दी है। अदालत ने कहा है कि राज्य स्तर के रेरा प्राधिकरण और अपीलीय ट्रिब्यूनल परियोजनाओं में देरी को मामले दर मामले आधार पर ही देखा जाएगा और ऐसी परियोजनाओं या डेवलपर्स के पंजीकरण को रद्द नहीं किया जाएगा जिसमें परियोजनाओं में देरी का कारण असाधारण परिस्थितिजन्य होगा।

Posted By: Praveen Dwivedi