नई दिल्ली (बिजनेस डेस्क)। अमेरिका की विमान निर्माता कंपनी बोइंग के सीईओ ने पहली बार स्वीकार किया है कि 737 मैक्स विमानों का मामला सुलझाने में कंपनी से चूक हुई है। बोइंग के सीईओ डेनिस म्यूलेनबर्ग ने एक इंटरव्यू में कहा कि इन विमानों के बारे में नियामकों को पर्याप्त जानकारी देने में कंपनी विफल रही। इस वर्ष दो 737 मैक्स विमानों के दुर्घटनाग्रस्त होने और इनमें 346 लोगों की जान जाने के बाद पहली बार कंपनी के शीर्ष अधिकारी की यह स्वीकारोक्ति है।

कंपनी ने पिछले दिनों ही कहा था कि इस वर्ष अगस्त अंत से पहले तक 737 मैक्स सीरीज के विमानों को सेवा में वापस लाना संभव नहीं होगा।म्यूलेनबर्ग से पूछा गया कि उन्होंने एक वर्ष से ज्यादा वक्त तक अमेरिका के केंद्रीय विमानन प्रशासन (एफएए) को इन विमानों में एक खास संकेत को निष्क्रिय कर देने की जानकारी क्यों नहीं दी। यह खास संकेत उन परिस्थितियों में पायलटों को सलाह देता है जब विमान के सेंसर किन्हीं वजहों से उसकी नोक (अगले हिस्से) के झुकाव के बारे में सटीक सूचना नहीं दे पाते हैं।

इस संकेत के निष्क्रिय होने की वजह से ही लायन एयर और इथोपियन एयरलाइंस के 737 मैक्स विमान दुर्घटनाग्रस्त हो गए। दो विमानों के दुर्घटनाग्रस्त होने से एक वर्ष से भी ज्यादा पहले बोइंग को इस खामी का पता चल गया था। लेकिन कंपनी ने नियामकों को इसकी जानकारी नहीं दी। दोनों विमानों के दुर्घटनाग्रस्त होने के बाद शुरुआती जांच में पता चला कि सेंसर की गलती की वजह से ही विमान के एमसीएएस सिस्टम ने विमानों की नोक को नीचे की तरफ झुका दिया और पायलट उसे नियंत्रित करने में नाकाम रहे। विमानन विशेषज्ञ एमसीएएस की आलोचना करते रहे हैं, क्योंकि यह एक वक्त में एक ही सेंसर के आंकड़े पढ़ सकता है, जिससे विमान इंजन के गलत तरीके से काम करने की संभावना बनी रहती है।

म्यूलेनबर्ग 737 मैक्स विमानों में डिजाइन की खामियों को हमेशा नकारते रहे हैं। उन्होंने कई बार कहा है कि कमी डिजाइन की नहीं, बल्कि क्रियान्वयन की है। उन्होंने माना कि इस बारे में सूचनाओं के आदान-प्रदान में चूक हुई है, लेकिन इन विमानों से यात्र सुरक्षित है। 

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Posted By: Sajan Chauhan

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