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स्मार्टफोन स्क्रीन प्रोटेक्टर के लिए अब BIS सर्टिफिकेशन अनिवार्य, 1 अप्रैल 2027 से लागू होगा नया नियम

By Jagran BusinessEdited By: Gyanendra Tiwari
Published: Tue, 22 Sep 2026 08:45 PM (IST)Updated: Tue, 22 Sep 2026 08:52 PM (IST)

भारत सरकार ने स्मार्टफोन स्क्रीन प्रोटेक्टर के लिए 1 अप्रैल 2027 से बीआईएस सर्टिफिकेशन अनिवार्य कर दिया है। इस कदम ...और पढ़ें

स्मार्टफोन स्क्रीन प्रोटेक्टर के लिए बीआईएस सर्टिफिकेशन अनिवार्य किया गया।

स्मार्टफोन स्क्रीन प्रोटेक्टर के लिए बीआईएस सर्टिफिकेशन अनिवार्य किया गया।

HighLights

  1. स्मार्टफोन स्क्रीन प्रोटेक्टर के लिए बीआईएस सर्टिफिकेशन अनिवार्य किया गया।

  2. यह नया नियम 1 अप्रैल 2027 से देशभर में लागू होगा।

  3. घटिया उत्पादों पर रोक लगेगी, घरेलू विनिर्माण को बढ़ावा मिलेगा।

नई दिल्ली। आपके स्मार्टफोन स्क्रीन प्रोटेक्टर के लिए एक नया नियम लागू हो रहा है। सरकार ने स्मार्टफोन स्क्रीन प्रोटेक्टर के लिए 'ब्यूरो ऑफ इंडियन स्टैंडर्ड्स' (BIS) सर्टिफिकेशन जरूरी कर दिया है। यानी भारत में ऐसे प्रोडक्ट बेचने से पहले कंपनियों को रेगुलेटरी मंजूरी (BIS का ठप्पा) लेनी होगी। इस कदम से घटिया क्वालिटी वाले स्मार्टफोन स्क्रीन प्रोटेक्टर की बिक्री पर रोक लगने और ऑप्टिमस इन्फ्राकॉम जैसी घरेलू कंपनियों को मदद मिलने की उम्मीद है, जिन्होंने भारत में प्रोडक्शन शुरू कर दिया है।

सोमवार को जारी एक आदेश के तहत, स्क्रीन प्रोटेक्टर (जो आमतौर पर टेम्पर्ड ग्लास से बने होते हैं) बनाने वाली कंपनियों को 1 अप्रैल, 2027 से BIS स्टैंडर्ड्स का पालन करना होगा चाहे वे इम्पोर्ट किए गए हों या देश में ही बने हों।

केंद्र सरकार द्वारा स्मार्टफोन स्क्रीन प्रोटेक्टर को अनिवार्य पंजीकरण आदेश (सीआरओ) के दायरे में लाने के फैसले का उद्योग संगठन इंडिया सेलुलर एंड इलेक्ट्रॉनिक्स एसोसिएशन (आईसीईए) ने स्वागत किया है। संगठन ने मंगलवार को कहा कि यह कदम घरेलू विनिर्माण को बढ़ावा देने के साथ-साथ रोजगार सृजन और गुणवत्ता सुधार में अहम भूमिका निभाएगा।

₹15000 करोड़ का मार्केट

'इंडियन सेल्युलर एंड इलेक्ट्रॉनिक्स एसोसिएशन' (ICEA) के अनुसार, भारत में स्क्रीन प्रोटेक्टर का बाजार सालाना 12,000 करोड़ रुपये से 15,000 करोड़ रुपये का है। भारतीय हर साल 50 करोड़ (500 मिलियन) से ज्यादा स्क्रीन प्रोटेक्टर खरीदते हैं और यह बाजार 10% की CAGR (कंपाउंड एनुअल ग्रोथ रेट) से बढ़ रहा है। नए नियम के तहत भारत में बिकने वाले सभी स्क्रीन प्रोटेक्टर, चाहे वे देश में बने हों या आयातित, उन्हें भारतीय मानक ब्यूरो (बीआईएस) का पंजीकरण प्राप्त करना अनिवार्य होगा।

60 हजार नौकरियों पैदा होने की संभावना

आईसीईए का कहना है कि इस कदम से सरकार को लगभग 2,000 करोड़ रुपये अतिरिक्त जीएसटी राजस्व प्राप्त हो सकता है। साथ ही प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से करीब 60,000 रोजगार सृजित होने की संभावना है। संगठन के अनुसार, इससे भारत वैश्विक स्तर पर गुणवत्तापूर्ण स्क्रीन प्रोटेक्टर विनिर्माण केंद्र के रूप में उभर सकता है।

उद्योग को नए नियमों के अनुरूप तैयार होने के लिए समय भी दिया गया है। अप्रैल 2027 से पहले घरेलू निर्माता अपनी उत्पादन इकाइयों को विकसित कर सकेंगे, प्रक्रियाओं को मानकों के अनुरूप बना सकेंगे और बीआईएस प्रमाणन हासिल कर सकेंगे। आईसीईए ने कहा कि अब तक स्क्रीन प्रोटेक्टर बाजार में गुणवत्ता नियंत्रण की अनिवार्यता नहीं होने के कारण बड़े पैमाने पर अनियमितताएं थीं।

कई उत्पादों को "टेम्पर्ड ग्लास" बताकर बेचा जाता था, जबकि वे वास्तव में निर्धारित गुणवत्ता और टेम्परिंग मानकों को पूरा नहीं करते थे। संगठन के अनुसार, वर्तमान में स्क्रीन प्रोटेक्टर की कीमतें 50 रुपये से 2,500 रुपये तक हैं, लेकिन कीमत और वास्तविक गुणवत्ता के बीच अक्सर कोई स्पष्ट संबंध नहीं होता। इसके अलावा, अंडर-इनवॉइसिंग और गलत घोषणा जैसी अनुचित व्यापारिक प्रथाएं भी बड़े पैमाने पर मौजूद हैं।

उद्योग निकाय का मानना है कि इन प्रथाओं से सरकार को जीएसटी राजस्व का नुकसान होता है और घरेलू रोजगार के अवसर भी प्रभावित होते हैं। आईसीईए के अनुमान के मुताबिक, भारत में हर वर्ष लगभग 50 करोड़ स्क्रीन प्रोटेक्टर की खपत होती है, जिनमें से 90 प्रतिशत से अधिक वर्तमान में आयात किए जाते हैं। संगठन का कहना है कि अनिवार्य गुणवत्ता मानकों के लागू होने से यह कारोबार अधिक संगठित होगा, आयात पर निर्भरता कम होगी और नियमों का पालन करने वाले घरेलू निर्माताओं के लिए समान प्रतिस्पर्धी माहौल तैयार होगा।

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नोट- एजेंसी इनपुट के साथ।