नई दिल्ली (बिजनेस डेस्क)। एक कॉरपोरेट ऑफिस में काम करने वाले कार्तिक मानते हैं कि सैलरी टैक्स ब्रैकेट में न होने की सूरत में आयकर रिटर्न फाइल नहीं करना होता है। हालांकि ऐसा सोचना पूरी तरह से गलत है। अगर आपकी सालाना सैलरी टैक्स ब्रैकेट में नहीं आती है तो भी आपको हर हाल में इनकम टैक्स रिटर्न (आईटीआर) फाइल करना चाहिए। एक्सपर्ट सलाह देते हैं कि नौकरी मिलने के साथ ही आयकर रिटर्न फाइल करने की शुरुआत कर देनी चाहिए।

विशेषज्ञों का कहना है कि एक अच्छा कॉरपोरेट नागरिक होने के साथ ही आयकर रिटर्न फाइल करना भी इसका प्रमाण होता है कि आपने अपनी कमाई पर टैक्स का भुगतान कर दिया है। इसलिए बेहतर सलाह यही है कि आपकी सैलरी भले ही टैक्स ब्रैकेट के दायरे में न आती हो आपको रिटर्न फाइल करना ही चाहिए। हम अपनी इस खबर में आपको आयकर रिटर्न फाइल करने के 10 फायदे बता रहे हैं।

  • ITR रिसीप्ट एक अहम दस्तावेज होता है। आईटीआर की रिसीप्ट होना इसलिए अहम होता है क्योंकि इसमें फॉर्म 16 की तुलना में ज्यादा डिटेल्ड जानकारी होती है। इसमें आपकी इनकम और अन्य स्रोतों से होने वाली आमदनी के साथ कराधान का उल्लेख होता है।
  • आईटीआर रिसीप्ट को आपके रजिस्टर्ड पते पर भेजा जाता है, इसे आप रेजिडेंट प्रूफ के तौर पर पेश भी कर सकते हैं।
  • अगर आप हर साल अपना इनकम टैक्स रिटर्न दाखिल करते हैं तो आपको लोन लेने में आसानी हो सकती है। आईटीआर आपकी आमदनी का प्रूफ होता है और निजी क्षेत्र के अधिकांश बैंक इसे प्रूफ के तौर पर स्वीकार करते हैं। आमतौर पर बैंक लोन देने से पहले इसकी मांग करते हैं।
  • अगर आप इनकम टैक्स फाइल करते हैं तो यह आपको एक फायदा भी दिला सकता है। अगर आपके नियोक्ता ने आपकी सैलरी से ज्यादा टीडीएस की कटौती कर दी है तो आप इस अतिरिक्त राशि के लिए आयकर रिटर्न फाइलिंग में क्लेम भी कर सकते हैं। आपको अतिरिक्त कटौती की राशि वापस कर दी जाएगी।
  • अगर आप आईटीआर समय पर फाइल करते हो तो आप लेट पेनाल्टी के साथ लगने वाले ब्याज का भुगतान करने से बच सकते हैं। पेनाल्टी पर लगने वाला इंटरेस्ट (ब्याज) आयकर की धारा 234 A के अंतर्गत वसूला जाता है जो कि एक फीसद होता है। उदाहरण से समझिए। मान लीजिए आपको 11,000 रुपये बतौर कर का भुगतान करना हो तो आपको इसका एक फीसद यानी 110 रुपये पेनाल्टी के साथ इंटरेस्ट भी देना होगा। यानी 31 जुलाई के बाद आपको पेनल्टी और उस पर ब्याज के भुगतान के साथ अपना आईटीआर दाखिल करना होगा।
  • अगर आप आईटीआर समय पर फाइल करते हो तो आर पेनाल्टी के भुगतान से बच सकते हैं। किस सूरत में लगती है कितनी पेनाल्टी...
  1. अगर आप भूल वश या जानबूझकर 31 जुलाई 2018 तक अपना आईटीआर दाखिल नहीं करते हैं तो आपको पेनाल्टी का भुगतान करना होगा जो कि अवधि के दौरान अलग अलग हो सकता है। यह पेनाल्टी आप पर आयकर की धारा 234F के अंतर्गत लगाई जाएगी।
  2. अगर आपकी आय पांच लाख तक या उससे कम है और आप 31 जुलाई तक आईटीआर दाखिल नहीं करते हैं तो आपको 1000 रुपये की पेनाल्टी देनी होगी।
  3. वहीं 5 लाख से ज्यादा आय होने की सूरत में 31 जुलाई से एक दिन की देरी पर भी आपको 5,000 रुपये की पेनाल्टी देनी होगी। हालांकि आपको इस सूरत में 31 दिसंबर तक अपना रिटर्न फाइल ही करना होगा।
  4. अगर आप अपना आईटीआर 1 जनवरी से 31 मार्च 2019 तक भरते हैं तो आपको 10,000 रुपये बतौर पेनाल्टी देने होंगे।
  • अगर आपने आईटीआर फाइल नहीं किया है तो संभव है कि बैंक आपके क्रेडिट कार्ड के एप्लीकेशन की प्रोसेसिंग को रोक सकता है।
  • आईटीआर फाइलिंग सिर्फ बैंक लोन दिलाने में ही मददगार नहीं है बल्कि यह वीजा प्राप्त करने यानी उसकी प्रोसेसिंग के लिए भी अहम होता है। काफी सारे देशों की वीजा अथॉरिटीज बीते 3 से 5 साल के आईटीआर की मांग करती हैं। आईटीआर के जरिए अथॉरिटीज वीजा प्राप्त करने वाले के फाइनेंशियल स्टेटस को चेक करने की कोशिश करती हैं।
  • कुछ स्थितियों में आपका आईटीआर दाखिल फायदेमंद रहता है जैसे कि जमीन का पंजीकरण। जमीन के पंजीकरण के दौरान आपसे बीते तीन साल के आईटीआर की मांग की जाती है। अगर आप इससे जुड़े दस्तावेज उपलब्ध करवा देते हैं तो आपको जाहिर तौर पर फायदा होगा।
  • अगर इंश्योरेंस कंपनी को लगता है कि आप कर चोरी करते हैं तो वो आपको ज्यादा कवर वाला इंश्योरेंस कवर देने से इनकार कर सकती है।

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By Praveen Dwivedi